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मुशर्रफ के ख़िलाफ मुहिम

रोजनामचा पर मुशर्रफ की भारत की क्रिकेट यात्रा के बारे में पढ़ा, और साथ ही सूचना दी उन्होंने ब्लागजगत की उन के खिलाफ मुहिम के बारे में। अँग्रेज़ी ब्लॉग जगत के नामी गिरामी चिट्ठाकार इस मुहिम में शामिल हो गए हैं, हिन्दी वालों ने भी खाता खोल लिया है, तो मैं ने सोचा बैनर को देसी ज़बान में लिखा जाए, वह भी मियाँ मुशर्रफ की। थोड़ी तुकबन्दी अँग्रेज़ी के बैनर में थी, थोड़ी हम ने भी कर दी। तो, बैनर पर यह शब्द लिखे हैं

आमिराना हुकुमरानों के लिए हिन्द में जगह नहीं
बगल में बम, हाथ में बल्ला,
हम भूले नहीं करगिल का हल्ला।
आया खेल देखने माशा-अल्ला,
दिल से है दहशत का दल्ला।

यदि अन्य कोई चिट्ठाकार अँग्रेज़ी के बैनर को प्रयोग करना चाहें तो यहाँ देखें। उर्दू वाला बैनर प्रयोग करना चाहें तो हाज़िर है। इस बैनर के ज़रिए हम शामिल हो रहे हैं मुशर्रफ की भारत यात्रा के खिलाफ मुहिम में। दुआ सलाम, राम राम, तब तक ठीक है जब तक बगल में छुरा न हो।

उर्दू लिखने में कोई ग़लती हुई हो तो जानने वाले बताएँ। मुश्किल यह है कि फारसी लिपि हमारी देसी भाषा के बिल्कुल उपयुक्त नहीं है। कई वर्ण हैं जिन की हमारे हिसाब से एक ही ध्वनि निकलती है, और कई ध्वनियाँ हैं जिन के लिए वर्ण ही नहीं हैं। इसलिए कनफ्यूजन बहुत होता है। मत्सु भाई ज़रा देखें।

बैनर बनाते समय अँग्रेज़ी के डिक्टेटर शब्द के लिए उर्दू शब्द खोज रहा था, तो पता चला शब्द है – आमिर। थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि यदि इस शब्द का कोई सकारात्मक अर्थ नहीं है तो आमिर खान (जो मेरे पसन्दीदा अभिनेताओं में से है) का नाम आमिर क्यों है? इस बात की छानबीन करनी पड़ेगी।

पुनश्च – “आमिर” शब्द के बारे में याहूग्रुप हिन्दी पर पूछा तो इमरान ने बताया कि यह शब्द दो तरीकों से लिखा जाता है, “अलिफ़” से (जैसे ऊपर लिखा गया है), और “ऐन” से। पहले का अर्थ है तानाशाह या हुकुमरान, और दूसरे का अर्थ है निर्माण करने वाला। ज़ाहिर है आमिर ख़ान का नाम “ऐन” से लिखा जाएगा, “अलिफ” से नहीं। उर्दू की लिखाई में दो ग़लतियाँ थीं जो मत्सु के बताने पर ठीक कर दी गईं। धन्यवाद इमरान और मत्सु।

7 replies on “मुशर्रफ के ख़िलाफ मुहिम”

No to Musharraf

Musharraf is not acceptable as India’s social guest

Display this graphic on your blog/website »

Indian taxpayers are paying for the security of a man who is personally responsible for the deaths of hundreds of Indian soldiers, and throug…

जय हो गुरूदेव

अब तो पाकिस्तानियों को भी पड़ने में दिक्कत नही होगी कि हमें मुशर्रफ मियाँ से क्या दिक्कत है|

– बग़ल: بغل.
(ग़ज़ल वाला “ग़” है)

– माशाल्लाह: ما شاء اللہ.
(हमज़ा “ء” , भी शब्द का ज़रूरी हिस्सा है. और अल्लाह का “अ” के लिए एक अलिफ़ चाहिए)

मुशर्रफ़ मियाँ के क्रकेट देखने आने से मुख़लिफ़ होना व्यक्तिगत आज़ादी तो है. लेकिन लगता है माशाल्लाह इस तरह ज़िक्र करना सही तो नहीं होगा.

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