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जापानी में भारत-आधारित चिट्ठे

कुछ दिन पहले मुझे अपने चिट्ठे के हिट-काउंटर पर दिखा कि मेरी परिणीता फिल्म पर लिखी प्रविष्टि पर कोई पाठक जापानी साइट से आया है। वहाँ देख कर अच्छा लगा कि कई चिट्ठे जापानी भाषा में ऐसे लिखे जा रहे हैं जो भारत पर आधारित हैं। यह चिट्ठे भारतीयों के हैं या जापानियों के यह स्पष्ट नहीं हो पाया। पर यह है बानगी जापानी में लिखे जा रहे भारतीय चिट्ठों की।

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8 replies on “जापानी में भारत-आधारित चिट्ठे”

रमण जी,

इस तरह का लेख पढ़कर खुशी होती है। लगता है अब आप भी सक्रिय होने वाले हैं। हिन्दी-चिट्ठाकारी के भविष्य के लिए अच्छा है।

मैं समझता हूं कि केवल जापान में ही नहीं पर चीन और तैवान में भी लोग हिन्दी चिट्ठा पढ़ते हैं मेरे चिट्ठों पर अक्सर इन तीनो देशों लोग चिट्टा पर आते हैं। यह लोग केवल एक पेज ही नहीं पर कई पेज पढ़ते हैं।

Kaafi pehle meri ek post ke saath bhi aisa hua tha, jiska link kisi जापानी ya aise kisi bhasha se aaya tha, ab apne ko to samajh aati nahi isliye pata nahi kya likha tha, lekin sandharbh tha itna hi pata chal paya.

जहाँ तक मैं समझता हूँ ये लोग हिन्दी अथवा भारतीय संस्कृति आदि के विद्यार्थी अथवा शोधार्थी आदि होंगे।

खैर अच्छा है इसी बहाने हिन्दी का प्रसार हो रहा है।

रमण जी,
सच कहूँ तो वो लिंक मैंने ही वहाँ लिख दिया था ताकि उस चिट्ठेककार, जो सालों से अपने साइट पे बहुत हिंदी फ़िल्मों की समीक्षा लिखते आए हैं, को आपके “परिणीता” पर विचार का पता चले. आपको बताए बिना रहने के लिए मुझे माफ़ कीजिए.
और हाँ, वे चिट्ठे जिनके स्क्रीन-शॉट आपने लगाए हैं, ये सब जापानी चिट्ठेकारों द्वारा लिखे गए हैं. (और एक राज़ की बात…, सबसे नीचे वाला मेरा जापानी चिट्ठा है, जिसके कारण आजकल हिंदी में लिखने से थोड़ी-बहुत फ़ुरसत ले रहा हूँ.)

>वहाँ देख कर अच्छा लगा कि….
यही देखके मुझे भी बहुत अच्छा लगा! उन चिट्ठेकारों में कई तो मेरे परिचित हैं, उन्हें भी इस लेख के बारे में बताऊँगा ज़रूर.

रमण जी मेरे चिट्ठे पर आप जैसे वरिष्ठ चिट्ठाकार का संदेश मिला, अच्‍छा लगा । जापान में हिंदी का आधार अच्‍छा बन रहा है । आपको पता होगा रेडियो जापान यानी एन0 एच0 के0 में हमारे देश से उदघोषक भेजे जाते हैं । सांस्‍कृतिक आदान प्रदान का कार्यक्रम चलता है । वहां जापान के कई ऐसे लोग हैं जो हिंदी में कार्यक्रम करते हैं । पिछले दिनों जापान का एक नाट्य समूह प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित नाटक लेकर आया और कई प्रस्‍तुतियां कीं । लोग दंग रह गये कि ये लोग इतनी साफ हिंदी कैसे बोल रहे हैं । इससे भी ज़ाहिर होता है कि हिंदी कितनी तेज़ी से फैल रही है । हां आपके रेडियो लिंक देखे, छह आठ महीने पहले किसी ने मुझे मेल से एक प्रोग्राम भेजा था, जिससे कुछ विदेशी रेडियो चैनल नेट पर सुने जा सकते थे । इस लिंक के कई चैनल मैंने सुन रखे हैं । पर ये तो वाक़ई भंडार है । मज़ा आ गया । बहुत शुक्रिया ।
यूनुस

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