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यूनिनागरी में अब शुषा, कृतिदेव लेआउट, और उर्दू भी

आप साइबर कैफे में, लाइब्रेरी में, दफ्तर में या किसी ऐसे कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं जहाँ आप को कुछ भी इन्स्टाल करने की आज़ादी नहीं है, और आप हिन्दी लिखना चाहते हैं। ऐसे में यूनिनागरी और हग जैसे ऑनलाइन टाइपराइटर बहुत काम आते हैं। मेरी साइट पर यूनिनागरी पिछले दो वर्षों से अधिक से चल रहा है, और कई लोग इसे नियमित प्रयोग कर रहे हैं। अनुभवी लेखकों के काम आने के इलावा इस तरह के टूल उन के भी काम आते हैं जो हिन्दी में लिखना शुरू कर रहे हैं, और अभी कुछ डाउनलोड-इन्स्टाल करने की स्थिति में नहीं हैं।

यूनिनागरी का अपना डिफॉल्ट कुंजीपटल फोनेटिक है, पर फोनेटिक नहीं भी। मतलब यह कि यह ट्रान्सलिट्रेशन नहीं करता, एक कुंजी से एक अक्षर टाइप होता है, जो जहाँ तक हो सके फोनेटिक होने के नज़दीक है (ट्रान्स्लिट्रेशन के लिए हग टूल बहुत बढ़िया काम करता है)। डिफॉल्ट कुंजीपटल के अतिरिक्त मैं ने यूनिनागरी में कुछ समंय पहले इन्स्क्रिप्ट कुंजीपटल जोड़ा था, जो कई लोगों के काम आ रहा है। रवि भाई का इसरार था कि इस में उन लोगों के लिए भी कीबोर्ड लेआउट बनाए जाएँ जो रेमिंगटन/कृतिदेव पर या शुषा पर लिखने के आदी हैं। इस से उन लोगों को भी यूनिकोड में कन्वर्ट करने में आसानी होगी, जो टाइपिंग की आदत नहीं बदलना चाहते और उस कारण कृतिदेव या शुषा प्रयोग कर रहे हैं, या यूनिकोड पर तो आ गए हैं, पर टाइपिंग में दिक्कत महसूस कर रहे हैं।

तो लीजिए हाज़िर है यूनिनागरी का नया रूप – जिस में कृतिदेव/रेमिंगटन और शुषा से मिलते जुलते कीबोर्ड जोड़ दिए गए हैं। जब इन्स्क्रिप्ट जोड़ा था तो साथ में गुरुमुखी लिपि का टाइपराइटर भी जोड़ा था। अब की बार बोनस है उर्दू का टाइपराइटर। इंटरनेट पर ऑनलाइन उर्दू एडिटर की कमी बहुत खल रही थी। उम्मीद है, भारत से और उर्दू चिट्ठाकार उभर कर आएँगे – अभी तक दो तीन ही हैं – जिन में से एक अपने शुएब भाई हैं। नए प्रयोक्ताओं के लिए एक आम प्रश्नोत्तरी भी जोड़ दी है। आगे का इरादा और भारतीय भाषाओं की टाइपिंग जोड़ने का है, ताकि यूनिनागरी एक इंडिक ऑनलाइन टाइपराइटर बन सके।

यदि आप स्वयं के कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं तो आम तौर पर ऑनलाइन टाइपराइटर की दरकार नहीं होती। मेरा मानना है कि मानकीकरण के लिए हम सब को इन्स्क्रिप्ट टाइपराइटर की आदत डाल लेनी चाहिए। इन्स्क्रिप्ट टाइपराइटर माइक्रोसॉफ्ट के इंडिक

Keyboard options on Indic IME 1 ver. 5

आइ.एम.ई. में उपलब्ध है ही। इंडिक आइ.एम.ई. 1 वर्जन 5 में और कई और कुंजीपटलों का चुनाव संभव है – रेमिंगटन है, पर शुषा नहीं। आप यह भी जानते होंगे (नहीं जानते हैं तो जान लीजिए) कि माइक्रोसॉफ्ट के कीबोर्ड लेआउट क्रिएटर टूल के द्वारा आप अपनी मर्ज़ी का कीबोर्ड लेआउट बना सकते हैं। इसे डाउनलोड कीजिए और जो लेआउट आप को पसन्द हो वह बनाइए।

25 replies on “यूनिनागरी में अब शुषा, कृतिदेव लेआउट, और उर्दू भी”

रमण भाई

हमारे एक मित्र है जो हिन्दी बिल्कुल नहीं समझते और उर्दू में अपना ब्लाग स्थापित करना चाहते. उन्हें ऑनलाईन या उर्दू में टाईप करने का कोई क्लू नहीं है, क्या आप उनके लिये मुझे उर्दू में कुछ इस तरह के मार्गदशक सुझाव भेज सकते हैं. आप चाहेंगे तो मैं उनको आपके सीधे संपर्क में भी ला सकता हूँ.

अगर कोई अड़चन हो तो बेझिझक बता दिजियेगा. 🙂

वाह वाह बहुत धन्यवाद ! ये टूल खासकर नए लोगों के लिए बहुत उपयोगी होगा। अब मेरे लिए बहुत आसानी हो गई, मैं अपने ट्टोरियलॊं में कौन सा ऑनलाइन टूल लिखूं अक्सर भ्रमित रहता था क्योंकि ऐसे बीसों टूल हैं और मैं स्व्यं उन में से कोई उपयोग नहीं करता, लेकिन अबसे बस यूनिनागरी बता सकता हूँ।

एक और चीज जो बहुत पसंद आई कि आपने इंटरफेस बहुत आकर्षक और सुन्दर बना दिया है। मेरे पास कुछ सुझाव हैं ऐसे टूल्स के संबंध में, किसी दिन चौपाल पर रखूंगा।

सभी की टिप्पणियों के लिए धन्यवाद।
समीर जी, अपने मित्र को अवश्य मुझ से संपर्क करने के लिए कहें। उर्दू चिट्ठा स्थापित करने के लिए वही सब करना है जो हिन्दी चिट्ठे के लिए। केवल टाइपिंग की समस्या है। उस के लिए यूनिनागरी का उर्दू कुंजीपटल प्रयोग कर सकते हैं, या एक और टूल जो मैं प्रयोग करता हूँ, वह है यूनिपैड। उर्दू चिट्ठाकारों का “नारद” है उर्दू सयारा। वहाँ के किसी भी चिट्ठाकार से संपर्क कर सकते हैं, और शुऐब से भी।

चलिए देखते हैं……….अरे वाह!
काम तो कर रहा है! वैसे की इंपरैशन में Indic IME से अंतर है! पर शुकरिया! (पता नही रेफ कैसे आएगा)

अब तक मैंने सैकड़ों लोगों को यूनिनागरी से यूनिकोडटंकण सिखाया है।बहुत सारे लोगों ने शुषा की मदद से यूनिकोड टंकण की बात की थी तब रजनीश मंगला का टूल प्रयोग करना पड़ता था। अब तो ऐसा भी करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आपने इतना सुंदर काम शुरू कर दिया है। अब उर्दूप्रयोक्ताओं को भी यहाँ भेजना पड़ेगा।

@masijeevi

(पता नही रेफ कैसे आएगा)

र के बाद हलन्त टाइप कीजिए, अगला अक्षर टाइप करते ही रेफ बन जाएगा।
@शैलेश
आप के उत्साह बढ़ाने का धन्यवाद।

आपका बहुत बहुत धन्यवाद.
अभिव्यक्ति वालों को शुषा कुंजीपट के बारे में अवश्य खबर करें. संभवतः शुषा का यह पहला ऑनलाइन औजार है, जो बहुतों के काम आएगा. सैकड़ों लोग अभी भी शुषा का ही प्रयोग करते हैं.

सबसे पहले तो आपका धन्यवाद और बधाई रमणजी,
Uninagari को एक नये रूप मे देख कर बहुत ख़ुशी हुई, मैं ने बहुत से अनलाईन हिन्दी editors यूज़ किए पर यकीन मानो Uninagari जैसा आसान हिन्दी टैपराईटर मुझे दूसरा नहीं मिला और मैं अपनी सभी हिन्दी पोस्टें इसी पर टैप करता हूं अपने चिट्ठे के लिए जिस के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
आपने उर्दू भाषा के लिए बहुत ही अच्छा नेक काम किया है, आपकी इस ”उर्दू ख़िदमत” पर मैं अपने ब्लॉग पर ज़रूर ज़िक्र करूंगा। ये वाकई मे एक आसान सा “Urdu Online typewriter” है। इस से पहले भी कुछ लोगों ने उर्दू आनलाईन टैपराईटर बनाया है एक मिसाल आप यहां http://www.urdupad.com/urdupad.html देख सकते हैं।
जी हां मैं ने आपका उर्दू टैपराईटर टेस्ट किया अच्छा लगा सिर्फ इसका कीबोर्ड ज़रा हटके है मतलब एक आम उर्दू टैपिस्ट का कीबोर्ड (आपको उस कीबोर्ड की फाईल मेल करता हूं) आपने उर्दू के लिए जो कीबोर्ड बनाया है, मैं समझता हूं आप ख़ुद ही अपने तौर से बनाया होगा या फिर शायद ये फ़ार्सी कीबोर्ड होसकता है। एनिवे आपके इस कारनामे पर बहुत ख़ुशी हुई – दूसरों के काम आने वाला वही सच्चा इंसान है 🙂

मैं रवि जी से सहमत हूँ बहुत से हिन्दी लेखक अभी तक यूनिकोड पर इसी लिए नहीं आए क्योंकि उन्हें शुषा का अभ्यास है। आप अभिव्यक्ति वालों को अवश्य इस बारे बताएं।

रमण, कमाल का काम. बहुत बहुत बधाई और शुक्रिया. ख़ासकर उर्दू वाला भाग जोड़ने के लिए.

एक बात शायद कुछ लोगों को पता न हो, कि यूनिनागरी केवल ऑनलाइन ही नहीं बल्कि ऑफ़लाइन भी काम करता है. यानि जो लोग डायल-अप पर हैं, वे इंटरनेट कनेक्शन बंद करने के बाद भी इसपर काम जारी रख सकते हैं. मेरा टूल हाइट्रांस, और इस्वामी का ‘हग’ भी इसी तरह के उपकरण हैं. इसलिए इन टूलों को ‘ऑनलाइन/ऑफ़लाइन उपकरण’ कहना ज़्यादा सही होगा.

Namaskar, main apna hindi ka blog banana chahata hoon, kya aap meri sahayata karege? main hindi tying bhi janta hoon per iska paryog kis prakar karu samaj nahi aata. maine 1-2 blog bhi banaye the parntu online hindi tying nahi kar pa raha hoon. jo articals main word/pagemaker main type( walkman chankya, ganesh, kurtidev )karke blg main paste karta hoon unka font hi badal jata hai. kirpya karke is sambandh main jankari dene ka kast karne,
dhanyabad,

raj

ماشا اللد شعیب بھاءی آپ نے وہ کام کیا ہے جس کی نظیر ملنی مشکل ہے آپ جیسے لوگوں کی اردو کو بیت ضرورت ہے

ایم مبین

महोदय,
यूनीकोड फोन्‍ट को नान यूनीकोड में आपसी परिवर्तित करने का तरीका या सॉफ्टवेयर यदि कोई विकसित हो चुका हो, तो कृपया जानकारी दिजिए

क्‍या हम कृतिदेव या अन्‍य ट्रू-टाईप फोन्‍ट्स में टाईप सामग्री को यूनिकोड फोन्‍ट में परिवर्तित कर सकते है और क्‍या हम यूनिकोड फोन्‍ट में टाईप सामग्री को अन्‍य नान यूनिकोड फोन्‍ट में परिवर्तित कर सकते है।
यदि ऐसा कोई सॉफ्टवेयर उपलब्‍ध हो तो कृपया बताने का कष्‍ट करें।

क्‍या हम यूनिकोड फोन्‍ट्स की सुविधा विण्‍डोज़ 98 ऑपरेटिंग सिस्‍टम पर पा सकते? अगर पा सकते है तो कैसे? अगर नहीं पा सकते है तो क्‍यों?

प्रकाश जी,

कृतिदेव से यूनिकोड में पाठ परिवर्तित करने के लिए इन साइटों पर जा सकते हैं।

http://www.thp.org/hindi/hindi.htm
http://uni.medhas.org/fileconverterindex.php5

विंडोज़-98 में आप को यूनिकोड पढ़ने-लिखने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए, केवल यह बात सुनिश्चित कर लें कि आप के पास हिन्दी का कोई यूनिकोड फॉंट है (जैसे कि मंगल,रघु, आदि)। यदि फॉंट प्राप्त करने में दिक्कत हो तो bbchindi.com पर जा कर हिन्दी फाँट डाउनलोड पर क्लिक करें। कोई दिक्कत हो तो दोबारा पूछें।

रमण

Dear Sir,
Urgently rquired latest most popular easy hindi font for email, website, Blog, book printing, job work etc. Please send me your kind suggetion and font with full introduction for multipurpose use.

Regards,
Laxman Singh

महोदय,
क्‍या हम किसी ट्रू टाईप फोन्‍ट्स जैसे एपीएस डीवी …. आदि को यूनिकोड में और यूनिकोड से एपीएस.. में कन्‍वर्ट कर सकते है, क्‍या ऑन लाईन फोन्‍ट परिवर्तन के लिए कोई सुविधा मौजूद है।

एक बात और कम्‍प्‍यूटर पर हिन्‍दी टंकण सिखने के बाद टंकण परीक्षा कम्‍प्‍यूटर के जरिये पास की जा सकती है, क्‍या ऐसा कोई प्रावधान है,
यदि नहीं, तो फिर क्‍यों डाटा एन्‍ट्री ऑपरेटर के पदों के लिए हिन्‍दी/अंग्रेजी टंकण की परीक्षा उत्‍तीर्ण करने की योग्‍यता होना आवश्‍यक किया जाता है, क्‍या इस समस्‍या के निराकरण के लिए कोई पहल नहीं की जानी चाहिये….

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