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उर्दू

दिल धड़कने का सबब याद आया

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी अब याद आया

आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया

दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा वादा-ए-शब याद आया

तेरा भूला हुआ पैमान-ए-वफ़ा
मर रहेंगे अगर अब याद आया

फिर कई लोग नज़र से गुज़रे
फिर कोई शहर-ए-तरब याद आया

हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख़सत हुए तब याद आया

बैठ कर साया-ए-गुल में नासिर
हम बहुत रोये वो जब याद आया

– नासिर काज़मी

4 replies on “दिल धड़कने का सबब याद आया”

[…] ¸ सीधी-सादी ग़ज़ल को लीजिए (पूरी ग़ज़ल यहाँ पर है)।

दिल धड़कने का सबब याद आया
वॠ[…]

[…] एक मिनट! एक मिनट! कुछ ज़्यादा उर्दू हो गई, है न? चलिए इसको ज़रा आसान बनाते हैं एक मिसाल की मदद से। नासिर क़ाज़मी की इस सीधी-सादी ग़ज़ल को लीजिए (पूरी ग़ज़ल यहाँ पर है)। […]

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