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गूगल ने नाम बदला, टोपीका रखा

आज सुबह सुबह गूगल खोला तो देखा गूगल के स्थान पर नाम है “टोपीका”। उसके नीचे लिंक था “हमारे नए नाम के बारे में जानें“। गूगल ब्लॉग पर बताया गया है कि गूगल ने अपना नाम क्यों बदला।

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विविध

पाठकों की प्रतीक्षा में

कई साल पहले (2004 में) जब यह चिट्ठा शुरू हुआ तो यही कोई 20 चिट्ठाकार थे हिन्दी चिट्ठा जगत में — पाठकों की संख्या भी एकाध सैंकड़े से अधिक नहीं रही होगी। इन्तज़ार रहता था कि कोई लिखे तो हम पढ़ें और टिप्पणी करें। आजकी स्थिति, जब हज़ारों की संख्या में हिन्दी चिट्ठाकार हैं और शायद लाखों में पाठक हैं, तब एक स्वप्न लगती थी। सितंबर 2005 में लिखा यह लेख उस स्वप्न को दर्शाता है।

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विविध

राजीव श्रीनिवासन – गांधार के कुरुक्षेत्र से

मैं आजकल राजीव श्रीनिवासन के चिट्ठे का नियमित पाठक बन गया हूँ। राजीव एक 23 वर्षीय युवा चिट्ठाकार हैं – पर इस चिट्ठाकार के विषय में विशेष यह है कि यह जिस जगह से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं, वह आजकल विश्व की सब से जोखिम भरी जगहों में से एक है। जी हाँ, राजीव अमरीकी थल सेना में लेफ्टिनेंट (या अमरीकी अंग्रेज़ी में – ल्यूटिनेंट) हैं, और आजकल पलटन कमांडर के रूप में कंदहार अफ्गानिस्तान में तैनात हैं।

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विविध

एक साल एक दहाई

इस चिट्ठे को पढ़ने वाले सभी दोस्तों को नया साल मुबारक। इस दिन पर इस चिट्ठे पर बहुत दिनों बाद कुछ बड़बड़।

आज एक नई दहाई शुरु हुई है, जो उम्मीद है दुनिया के लिए कुछ खुश खबर ले कर आएगी। इस सदी की पहली दहाई में आतंक का ही बोलबाला रहा – 9-11, 26-11, 7-7, ईराक, अफगानिस्तान, ईरान, सूडान, और न जाने क्या क्या? पर घटनाएँ आम तौर पर अंकों की मोहताज नहीं होती। समयचक्र के लिए एक नई दहाई शुरू होने का कोई अर्थ नहीं है। विश्व घटनाक्रम के लिए 1 जनवरी 2010, ऐसा ही है जैसा कोई और दिन। इसलिए यह उम्मीद करना कि दहाई बदलने से घटनाक्रम बदल जाएगा, खुद को झूठी तसल्ली देना ही है। मैं अंकविद्या में विश्वास नहीं करता, इस कारण व्यक्तिगत जीवन मे सदी या दहाई बदलने से कुछ होगा, यह नहीं मानता।

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भारत

सुर बने हमारा

बासठवें स्वतन्त्रता दिवस पर सभी भारतवासियों को शुभकामनाएँ।

इस अवसर पर एक बार फिर पढ़िए आज से चार वर्ष पहले लिखी यह पोस्ट जिस में मिले सुर मेरा तुम्हारा के हर भाषा के बोल संकलित किए गए थे। आज एक और छोटी सी सूचना, समय-लाइव के सौजन्य से

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उर्दू कश्मीर भारत

कश्मीर की जंग पॉलीथीन के संग

श्रीनगर, कश्मीर के अंग्रेज़ी अखबार ग्रेटर कश्मीर का ई-पेपर संस्करण देख रहा था तो मुख्यपृष्ठ पर यह रोचक उर्दू विज्ञापन दिखा। विज्ञापन को पढ़िए, स्वयं समझ जाएँगे कि क्या रोचक है इस में। यदि उर्दू नहीं आती तो नीचे हिन्दी अनुवाद दिया हुआ है।

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मनोरंजन

यह किस फिल्म का गाना है

यह गीत किस फिल्म का है? बोल कुछ इस प्रकार हैं

गली गली में रामा चर्चा हुआ है
शोर मचा है रामा शोर मचा है
गाँव में इक छोरी सोलह की हुई है
रूप से गोरी बड़ी बला की मुई है

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विदेश विविध

हमनाम हमसफ़र

यह समाचार रोचक है। आज सुबह एमएसएनबीसी पर देखा, तो सोचा आप के साथ शेयर करूँ। इसी बहाने कई दिन बाद कुछ लिखा जाएगा। तो हुआ यूँ कि केली हिल्डेब्राँड नाम की एक युवती फेसबुक पर थी। उसने सोचा, जैसा कि हम सब सोचते हैं, कि अपने नाम पर खोज की जाए। अब यह नाम तो इतना आम नहीं है, पर पता लगा कि फेसबुक पर उसी नाम का एक और प्रयोक्ता है, पर वह पुरुष है। उसे ऐसे ही एक संदेश भेजा, कि हम हमनाम हैं तो मैं ने सोचा नमस्ते कह दूँ। बात कुछ आगे बढ़ी, और कुछ समय बाद पुरुष केली सफर पर रवाना हुए और स्त्री कैली से मिल आए। बात फिर आगे बढ़ी और अब केली और केली शादी कर रहे हैं। जी हाँ, केला और केली नहीं, केली और केली। पूरी कहानी उन्हीं की ज़बानी सुनिए –

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विदेश

नस्लभेदी हत्यारा 88 वर्ष का था

James Von Brunnऐसा लगता है कि अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी की लिबरल (उदारवादी) विचारधारा की सरकार बनने के बाद दक्षिणपन्थी कुछ अधिक ही सक्रिय हो गए हैं। पिछले सप्ताह एक गर्भपात कराने वाले डॉक्टर का कत्ल होने के बाद आज एक और नस्लवादी घटना हुई। वाशिंगटन डीसी के हॉलोकास्ट म्यूज़ियम, जिस में यहूदियों पर हुए अत्याचारों को दर्शाया जाता है, पर एक 88 साल के बूढ़े नव-नाज़ी ने कथित रूप से हमला किया। नियो-नाज़ी लोग हिटलर के प्रशंसक होते हैं और उसी की तरह यहूदियों और अश्वेतों से घृणा करते हैं।

यह व्यक्ति जिस का नाम जेम्स वॉन ब्रन था, 25 साल पहले भी नस्लवाद के आरोपों पर 6 वर्ष की सज़ा काट चुका था और अपनी वेबसाइट (holywesternempire.org जो कि कुछ देर पहले हटा ली गई है) पर कहता था कि उस की सज़ा के लिए काले और यहूदी जज/वकील/जूरी ज़िम्मेदार थे। ब्रन कहता था कि यहूदियों पर कोई ज़ुल्म नहीं हुआ, और ऍन फ्रैंक की डायरी मनघडन्त थी। ब्रन की वेबसाइट के विषय में यह वीडियो देखिए।

ब्रन को म्यूज़ियम के सुरक्षा कर्मचारियों ने रोका, पर फिर भी एक सुरक्षा कर्मचारी जो कि अश्वेत था, उस की गोली का शिकार हुआ और बाद में मारा गया।

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विविध

सीएनएन और ऐशटन कूचर की ट्विट्टर जंग

kaulcenter@twitter140 अक्षरों की संदेश पत्रिका, यानी ट्विट्टर पर आप कितने सक्रिय हैं, इस के तीन मुख्य मापदंड हैं – आप कितना लिख रहे हैं (अपडेट्स या लेख संख्या), आप कितने लोगों का लिखा पढ़ रहे हैं (फॉलोइंग या पठन संख्या) और आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं (फॉलोवर्स या पाठक संख्या)। पहली दो संख्याएँ बढ़ाना तो आप के अपने हाथ में है, यानी आप बहुत लिखिए और बहुत लोगों को पढ़िए, पर वास्तव में सफलता की निशानी है पाठक संख्या, यानी आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं। और यह संख्या बढ़ाना आसान नहीं है।