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भारत विविध

377 पर 7 तर्क

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बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ।

1861 में अंग्रेज़ों की बनाई IPC धारा 377 के अनुसार आदमी-आदमी के प्यार को अपराध करार दिया गया था। आज डेढ़ सौ साल बाद हम इस धारा को हटाने के प्रयासों में असफल हो गए हैं। मेरे हर दोस्त का इस बारे में कुछ कहना है, और बहुत कम लोगों को सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ग़लत लगा है। मुझसे पहले की पीढ़ी के लोगों के ऐसे विचार हों, ऐसा स्वाभाविक है, पर मेरी पीढ़ी और कुछ मुझ से अगली पीढ़ी के कुछ लोगों के भी इस मामले पर विचार कुछ पुराने हैं। स्वयं को इस शोर में अकेला तो पा रहा हूँ, पर एक खुशी है कि यह चर्चा अब बंद नहीं होने जा रही, और जितनी चर्चा होगी, उतनी लोगों को सूचना मिलेगी और उतनी लोगों की आँखें खुलेंगी। ऐसी मेरी उम्मीद है। मैं स्वयं भी पहले समलैंगिकता के विषय पर पूरी तरह निष्पक्ष नहीं था, इस कारण मैं किसी को पूरी तरह दोषी भी नहीं ठहराता। पर जैसे जैसे और जानकारी हासिल की, मेरे विचार बदले। आशा करता हूँ कि और लोग भी आँखें खुली रखेंगे, जानकारी हासिल करेंगे, और फिर निर्णय लेंगे।

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विविध

सफर पराई रेल का

वाशिंगटन-बॉस्टन असेला एक्सप्रेस पर मेरे सामने की सीट पर जो खिड़की के साथ महिला बैठी हैं, वह पिछले पौने घंटे से फोन पर बात करने में लगी हुई हैं। उनकी सीट की पीठ मेरी ओर है, इस कारण मुझे दिख नहीं रहीं, पर ऐसा लगता है कि अपने दफ्तर का कोई मसला हल कर रही हैं। उन्हें अपने बॉस से शिकायत है, और इस बारे में या तो अपने सहकर्मी से या अपने बॉस के सहकर्मी से बात कर रही हैं। लगातार बोले जा रही हैं। कुछ महिलाएँ कितना बोल सकती हैं। आधा घंटा पहले उनके साथ जो दूसरी महिला बैठी हुई थीं, वह अपना लैपटॉप, कोट और बैग लेकर झुंझलाती हुई उठीं और आगे की किसी सीट पर चली गईं। एक मिनट बाद पी.ए. सिस्टम पर ऍनाउन्समेंट हुई – “यात्रीगण कृपया ध्यान दें, जो यात्री फोन पर बात कर रहे हैं वे अपने सहयात्रियों का ध्यान रखते हुए कृपया अपनी आवाज़ धीमी रखें, या फिर कैफे-यान में चले जाएँ।” लगता है महिला नंबर दो सीधा कंडक्टर से शिकायत करने गई थीं। मुझे नहीं लगता कि फोन पर बात कर रही महिला ने यह उद्घोषणा सुनी भी,

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मनोरंजन विविध

पाकिस्तान फैशन वीक है जी

आज हफिंगटन पोस्ट में पिछले नवंबर में हुए पाकिस्तान फैशन वीक से यह तस्वीर छपी है। पोस्ट नें लेख का शीर्षक दिया है “वाट द….?”। सच है, तस्वीर अपनी कहानी खुद कहती है, शब्दों की अधिक आवश्यकता नहीं है। मेरा बस यह कहना है… यह फैशन वीक है, या फैशन वीक है?

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विविध

छाता लेकर निकले हम

फरवरी में भारत यात्रा के दौरान कार्यक्रम बना श्रीलंका घूमने का। श्रीलंका भ्रमण का अनुभव बहुत ही बढ़िया रहा। विस्तार से जल्दी लिखूँगा, फिल्हाल यह लघु-चित्र-प्रविष्टि। वहाँ, छाते का एक अनूठा प्रयोग देखने को मिला। अक्सर प्रेमी युगल छाता साथ लेकर चलते हैं — अकस्मात वर्षा हो जाए, उसमें तो काम आ ही जाएगा, पर न भी हो तो आप कहीं भी अपना निजी प्रणय-कक्ष बना सकते हैं। गाल अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास खींचे गए यह दो चित्र देखिए।

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विविध

गूगल ने नाम बदला, टोपीका रखा

आज सुबह सुबह गूगल खोला तो देखा गूगल के स्थान पर नाम है “टोपीका”। उसके नीचे लिंक था “हमारे नए नाम के बारे में जानें“। गूगल ब्लॉग पर बताया गया है कि गूगल ने अपना नाम क्यों बदला।

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विविध

पाठकों की प्रतीक्षा में

कई साल पहले (2004 में) जब यह चिट्ठा शुरू हुआ तो यही कोई 20 चिट्ठाकार थे हिन्दी चिट्ठा जगत में — पाठकों की संख्या भी एकाध सैंकड़े से अधिक नहीं रही होगी। इन्तज़ार रहता था कि कोई लिखे तो हम पढ़ें और टिप्पणी करें। आजकी स्थिति, जब हज़ारों की संख्या में हिन्दी चिट्ठाकार हैं और शायद लाखों में पाठक हैं, तब एक स्वप्न लगती थी। सितंबर 2005 में लिखा यह लेख उस स्वप्न को दर्शाता है।

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विविध

राजीव श्रीनिवासन – गांधार के कुरुक्षेत्र से

मैं आजकल राजीव श्रीनिवासन के चिट्ठे का नियमित पाठक बन गया हूँ। राजीव एक 23 वर्षीय युवा चिट्ठाकार हैं – पर इस चिट्ठाकार के विषय में विशेष यह है कि यह जिस जगह से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं, वह आजकल विश्व की सब से जोखिम भरी जगहों में से एक है। जी हाँ, राजीव अमरीकी थल सेना में लेफ्टिनेंट (या अमरीकी अंग्रेज़ी में – ल्यूटिनेंट) हैं, और आजकल पलटन कमांडर के रूप में कंदहार अफ्गानिस्तान में तैनात हैं।

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विविध

एक साल एक दहाई

इस चिट्ठे को पढ़ने वाले सभी दोस्तों को नया साल मुबारक। इस दिन पर इस चिट्ठे पर बहुत दिनों बाद कुछ बड़बड़।

आज एक नई दहाई शुरु हुई है, जो उम्मीद है दुनिया के लिए कुछ खुश खबर ले कर आएगी। इस सदी की पहली दहाई में आतंक का ही बोलबाला रहा – 9-11, 26-11, 7-7, ईराक, अफगानिस्तान, ईरान, सूडान, और न जाने क्या क्या? पर घटनाएँ आम तौर पर अंकों की मोहताज नहीं होती। समयचक्र के लिए एक नई दहाई शुरू होने का कोई अर्थ नहीं है। विश्व घटनाक्रम के लिए 1 जनवरी 2010, ऐसा ही है जैसा कोई और दिन। इसलिए यह उम्मीद करना कि दहाई बदलने से घटनाक्रम बदल जाएगा, खुद को झूठी तसल्ली देना ही है। मैं अंकविद्या में विश्वास नहीं करता, इस कारण व्यक्तिगत जीवन मे सदी या दहाई बदलने से कुछ होगा, यह नहीं मानता।

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विदेश विविध

हमनाम हमसफ़र

यह समाचार रोचक है। आज सुबह एमएसएनबीसी पर देखा, तो सोचा आप के साथ शेयर करूँ। इसी बहाने कई दिन बाद कुछ लिखा जाएगा। तो हुआ यूँ कि केली हिल्डेब्राँड नाम की एक युवती फेसबुक पर थी। उसने सोचा, जैसा कि हम सब सोचते हैं, कि अपने नाम पर खोज की जाए। अब यह नाम तो इतना आम नहीं है, पर पता लगा कि फेसबुक पर उसी नाम का एक और प्रयोक्ता है, पर वह पुरुष है। उसे ऐसे ही एक संदेश भेजा, कि हम हमनाम हैं तो मैं ने सोचा नमस्ते कह दूँ। बात कुछ आगे बढ़ी, और कुछ समय बाद पुरुष केली सफर पर रवाना हुए और स्त्री कैली से मिल आए। बात फिर आगे बढ़ी और अब केली और केली शादी कर रहे हैं। जी हाँ, केला और केली नहीं, केली और केली। पूरी कहानी उन्हीं की ज़बानी सुनिए –

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विविध

सीएनएन और ऐशटन कूचर की ट्विट्टर जंग

kaulcenter@twitter140 अक्षरों की संदेश पत्रिका, यानी ट्विट्टर पर आप कितने सक्रिय हैं, इस के तीन मुख्य मापदंड हैं – आप कितना लिख रहे हैं (अपडेट्स या लेख संख्या), आप कितने लोगों का लिखा पढ़ रहे हैं (फॉलोइंग या पठन संख्या) और आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं (फॉलोवर्स या पाठक संख्या)। पहली दो संख्याएँ बढ़ाना तो आप के अपने हाथ में है, यानी आप बहुत लिखिए और बहुत लोगों को पढ़िए, पर वास्तव में सफलता की निशानी है पाठक संख्या, यानी आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं। और यह संख्या बढ़ाना आसान नहीं है।