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जीमेल के बीच चित्र डालिए

जीमेल के आधिकारिक चिट्ठे पर हुई घोषणा के अनुसार अब आप जीमेल में चित्र डाल सकते हैं, वैसे ही जैसे आप किसी ब्लॉगर पोस्ट में डालते हैं। यानी बजाय चित्र को संलग्न करने के, अब आप उसे ईमेल के बीच में भी घुसा सकते हैं। यह फीचर जीमेल लैब्स का नवीनतम फीचर है, और आप को इसे जीमेल की सैटिंग्स में जा कर लैब्स टैब के अन्तर्गत सक्रिय करना पड़ेगा। पहले आप को यही करने के लिए एचटीएमएल मेल बनाना पड़ता, जो अब जीमेल ने आसान कर दिया है।

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जीमेल खोज और सुगम हुई

गूगल ने जीमेल-लैब्स में एक और बढ़िया फीचर की घोषणा की है – अब जीमेल खोज में आप ऑटो-कंप्लीट को सक्रिय कर सकते हैं। यानी आप यदि अपने किसी मित्र का ईमेल खोजना चाहते हैं, तो जैसे ही आप उन के नाम का पहला अक्षर टाइप करेंगे, जीमेल आप को वे सभी नाम सुझाएगा जिन में वह अक्षर है। फिर अपने काम के नाम पर क्लिक कीजिए और खोजिए। अन्य कई नए जुड़े फीचरों की तरह ही इस फीचर को भी आप को पहले जीमेल लैब्स में जा कर सक्रिय करना होगा। अपने जीमेल में सैटिंग्स पर क्लिक कीजिए, फिर लैब्स वाला टैब चुनिए और अपने इच्छित फीचर को सक्रिय कीजिए। अभी तो इस में केवल ईमेल पतों के आधार पर ऑटो कंप्लीट की सुविधा है। और भी बढ़िया होगा, यदि कोई भी अक्षर लिखने पर उस से संबन्धित केवल ईमेल पते ही नहीं, पर ईमेल के भीतर के अन्य शब्द या वाक्यांश भी दिखें। कितना आलसी बनाएँगे यह लोग हमें?

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हिन्दी में जीमेल – नया तो नहीं

Gmail in Hindi in 2005जीमेल ने घोषणा की है कि अब आप सीधे जीमेल में जा कर हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओं में ईमेल लिख सकते हैं। धन्यवाद गूगल। यह घोषणा जीमेल ब्लॉग और गूगलब्लॉग पर ताज़ी ताज़ी हुई है। इस से कई नए लोग हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में मेल लिख सकते हैं। पर मुझे गूगल के इस वक्तव्य से आपत्ति है कि

अब तक मित्रों और संबन्धियों को हिन्दी में ईमेल भेजने की कोई अच्छी विधि नहीं थी।

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जीमेल – रुको रुको, अभी मत भेजो

जीमेल ने आज एक नया फीचर जोड़ा है, जिस के द्वारा आप कमान से निकले तीर को वापस कर सकते हैं — यदि एकदम ख्याल आ जाए तो। क्या आप के साथ कभी ऐसा हुआ है कि मेल लिख कर जल्दी में “भेजो” बटन पर क्लिक दिया, और क्लिक करते ही याद आया कि अरे, जो फाइल संलग्न करनी थी, वह तो की नहीं। या मेल लिख कर क्लिक करते ही ध्यान में आया कि यह लिखना तो रह गया, या यह नहीं लिखना चाहिए था, या अरे, वर्तनी तो जाँची नहीं। मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है। जीमेल के आधिकारिक ब्लॉग पर आज दी गई सूचना के अनुसार आप यदि जीमेल प्रयोगशाला के इस फीचर को सक्रिय करते हैं, तो आप को पाँच सेकंड का समय मिलेगा यह तय करने का कि आप उस मेल को रोकना चाहते हैं या नहीं। पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए इस पृष्ठ पर जाएँ।

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महापिक्सल फोटो – एक नई तकनीक

इंटरनेट की खूबी यह है कि हर रोज़ आप को कुछ न कुछ नया देखने-सीखने को मिलता है। यदि शाम तक याद रहे तो एक अदद ब्लॉग-पोस्ट हो जाती है। हाँ तो आज एक मेल फॉर्वर्ड मिला जिस में बराक ओबामा के राज्याभिषेक समारोह के एक चित्र की कड़ी थी। इस में यूँ तो कोई खास बात नहीं होनी चाहिए, पर इस वाले चित्र में यह खास बात थी कि उस में आप क्लिक कर के ज़ूम कर सकते हैं, दाएँ बाएँ पैन कर सकते हैं – यहाँ तक कि लाखों लोगों के चेहरों को देख सकते हैं – वह भी करीब से। ज़रा और खोजबीन की तो मालूम हुआ कि इस तकनीक का नाम गिगापैन तकनीक है। इस बात को मैं “आज के दिन की सीख” कह सकता हूँ।

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वर्डप्रेस 2.6 अपग्रेड

यदि आप अपने चिट्ठे के लिए अपने सर्वर पर वर्डप्रेस का प्रयोग कर रहे हैं, तो वर्डप्रेस का नया रूपान्तर 2.6 इन्सटाल कर लें। कई प्रयोक्ताओं को वर्डप्रेस 2.6 अपग्रेड करने के बाद, लॉग-इन करने में दिक्कत आई है। मुझे भी आई। यदि आप को लॉग-इन करने की समस्या आती है, तो उस का इलाज यह है कि अपने कंप्यूटर पर से कुकियों (cookies) को खत्म करें

वर्डप्रेस 2.6 में नया क्या है, यह इस वीडियो में देखें –

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जीमेल “बेटा” की शैतानियाँ

Gmail Betaजीमेल, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? माना तुम स्वयं को बेटा* मानते हो, पर हम ने तो हमेशा से तुम्हें बड़ा माना है, और दूसरों से बढ़ कर दर्जा दिया है।

जीमेल वाले सुनें या न सुनें, पर आप सुन लीजिए। यदि आप के जीमेल में डॉट है तो उस का जीमेल वालों के लिए कोई अर्थ नहीं है। नहीं समझ में आया? बताता हूँ। अवांछित ईमेल यानी स्पैम को रोकने के मामले में तो जीमेल का शायद सानी न हो, पर मेरे खाते में कई बार कुछ अलग किस्म के अवांछित ईमेल आ जाते हैं।

पिछले साल जून में मेरे जीमेल में किन्हीं महिला का ईमेल कुछ इस तरह का आया, अनुवाद कर रहा हूँ

रमण, किसी कारण से पिछले कुछ दिनों से तुम्हारे बारे में बहुत सोचने लगी हूँ। तुम्हें मेल करने का सोचती हूँ तो यह याद आता है कि तुम कितने सुस्त हो मेल चैक करने में। तुम्हें फोन करने का सोचती हूँ तो कांपते हुए ख्याल आता है पता नहीं किस मूड में होगे – कहीं तुम मुझ पर बरस न पड़ो, या बेरुखी न दिखाओ। जब तुम ऐसा करते हो तो मेरा दिल टूट जाता है। इसलिए फोन ही नहीं करती…

यह शुरुआत थी एक लंबे चौड़े ईमेल की जो ब्लैकबेरी से भेजा गया था। बहुत मर्म भरा ईमेल था, जिस में कोशिश की गई थी एक पुराने रिश्ते को पुनर्जीवित करने की। बाकी सब तो ठीक था, मुझे यह लांछन बरदाश्त नहीं हुआ कि “ईमेल चैक करने में सुस्त हो”। 🙂 मेरे पास तो ईमेल बाद में आता है, मैं चैक पहले करता हूँ। मैं ने फौरन वापस लिखा, दो शब्दों में – “गलत रमण”। उस का भी फौरन जवाब आया, “धन्यवाद। क्षमा। मैं यकीन नहीं कर सकती कि इस नाम के दो लोग होंगे। Too much of a good thing! 🙂 Hard to believe!!” मैं ने सोचा, “थैंक यू”। दरअसल मैं भी सोचता था कि मेरा नाम इतना आम नहीं है।

बात आई गई हो गई। फिर कुछ हफ्तों बाद, मेरे जीमेल में हच कंपनी का मोबाइल बिल आया। यह किसी और रमण कौल के नाम था, जो फरीदाबाद में रहते हैं। मेरे यह हमनाम ऊपर वाले रमण कौल से अलग थे (अलग शहर)। मैं ने इस ईमेल को कचरे में डाल दिया। अगले महीने फिर आया। मैं ने हच को लिखा कि आप ग़लत ईमेल पर बिल भेज रहे हैं, मैं तो भारत में रहता भी नहीं और मैं आप का ग्राहक नहीं हूँ। उन का स्वचालित उत्तर आया कि हमें संपर्क करने के लिए धन्यवाद, आप की समस्या का समाधान शीघ्रातिशीघ्र किया जाएगा। अगले महीने फिर। फिर अगले महीने वोडाफोन का बिल आया। पता चला हच अब वोडाफोन है। इस बार मैं ने फोन नंबर देख कर भारत में अपने भाई को कहा, उस नंबर पर फोन कर के फोन के मालिक को बता दे। अगले महीने फिर बिल आया। इस बार वोडाफोन को भी लिखा, और फोन नंबर के मालिक को भी फोन लगाया। कश्मीरी में बात की – उन के फोन रिकॉर्ड से पता चल ही गया था कि जम्मू बहुत फोन जा रहे हैं, इसलिए “डालडा कश्मीरी”** नहीं हैं। मैं ने उन से कहा, “रमण जी, मैं रमण बोल रहा हूँ। यह बताइए कि आप का ईमेल पता क्या है?” बोले, “रमण डॉट कौल एट जीमेल डॉट कॉम”। मैं ने कहा यह तो मेरा जीमेल पता है। वे बोले, “अच्छा सॉरी, यह तो मेरा हॉटमेल वाला है, जीमेल वाले में डॉट नहीं है”। मैं ने कहा, “तो फिर आप अपनी मोबाइल कंपनी को फोन पर बताइए न, कि वे ग़लत पते पर बिल भेज रहे हैं”। वे बोले, “हाँ पहले भी आप का सन्देश मिला था, मैंने बताया भी था वोडाफोन को। अभी फिर फोन करता हूँ उन्हें।”

फिर और छानबीन की तो जीमेल सहायता पन्नों से यह पन्ना हाथ लगा: http://mail.google.com/support/bin/answer.py?answer=10313#

जीमेल वाले लिखते हैं,

Gmail doesn’t recognize dots as characters within usernames, adding or removing dots from a Gmail address won’t change the actual destination address. Messages sent to yourusername@gmail.com, your.username@gmail.com, and y.o.u.r.u.s.e.r.n.a.m.e@gmail.com are all delivered to your inbox, and only yours.

यानी आप के पते में कोई डॉट नहीं है, या दस डॉट हैं, जीमेल उसे एक ही पता समझता है, डॉटों को गिनता ही नहीं। यदि ऐसा है तो फिर मेरे नामराशि को बिना डॉट वाला पता कैसे मिला? कहीं ऐसा तो नहीं कि शुरू शुरू में वे डॉट को गिनते थे और बाद में गिनना बन्द किया? क्या हमें पुराना ग्राहक होने की सज़ा मिल रही है, जब जीमेल खुद को बेटा कहता था, पर था एल्फ़ा? यदि ऐसा है तो क्या मेरे ईमेल भी दूसरों को मिलते हैं? इस सब का कोई जवाब नहीं। जीमेल खुद को बेटा कहता है, इसलिए क्या उस से ज़िम्मेदारी की उम्मीद करना ग़लत है? यह कई प्रश्न हैं जिन का उत्तर नहीं है।

इस बीच हर महीने, बिना नागा, मेरे पास वोडाफ़ोन का बिल आता है। हर बार मैं उन को जवाब देता हूँ कि अपना पता ठीक करें। अपने नामराशि के हॉटमेल (डॉट के साथ) और जीमेल (बिना डॉट के) पर सीसी कर देता हूँ। जवाब में, जीमेल पर भेजा गया ईमेल मेरे खाते में वापस आ जाता है, हॉटमेल से कोई जवाब नहीं आता, और वोडाफ़ोन का स्वचालित मेल आ जाता है,

Dear Customer,
Thank you for writing to us.
This is an automated response to your e-mail. We will respond to you within 2 working days.
……
In the meantime, if you need any further assistance, please do call us on 111 (toll free) from your Vodafone mobile phone. We’ll do our best to help you.

Happy to help,
Vodafone Care

वे दो वर्किंग डेज़ कभी पूरे नहीं होते। हाँ, कस्टमर की सीक्योरिटी के लिए अब उन का बिल पासवर्ड सुरक्षित पीडीएफ़ के रूप में आता है। और पासवर्ड ईमेल में लिखा हुआ है – नाम के पहले चार अक्षर और नंबर के अन्तिम चार अंक। मेरे लिए कितना मुश्किल है इस पासवर्ड का राज़ खोलना।

क्या आप के जीमेल पते में नुक़्ता है? क्या आप में से किसी के पास जीमेल बेटा की शैतानियों के किस्से हैं? या फिर वोडाफोन के? या कोई लवलेटर आते हों? टिप्पणी कीजिए।
—-
* ग्रीक अक्षर β जिसे हम भारत में बीटा कहते हैं, अमरीकी उसे बेटा कहते हैं। बीटा- या बेटा-सॉफ़्टवेयर का अर्थ है रिलीज़ से पहले का प्रारूप, जिसे केवल टेस्टिंग के लिए रिलीज़ किया जाता है। यानी गूगल वालों के लिए पल्ला झाड़ने के लिए काफी है। पर क्या आप यह मानते हैं कि जीमेल अभी परीक्षण के अन्तर्गत है?
** मेरे एक मित्र हैं यहाँ राज़दान साहब, जो स्वयं को “डालडा कश्मीरी” कहते हैं। इस वर्ग में वे कश्मीरी पंडित आते हैं, जो कश्मीर से सदियों पहले आए हैं, और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आदि में बस गए हैं। ये लोग कश्मीरी तो हैं, पर कश्मीरी भाषा नहीं बोलते। समय के साथ उन के रस्मो-रिवाज भी कुछ कुछ बदल गए हैं। इस वर्ग में आप कुछ प्रसिद्ध कश्मीरी परिवार जैसे नेहरू परिवार, और उन से जुड़े अन्य परिवार – शीला कौल, कैलाशनाथ काट्जू, आदि को रख सकते हैं।

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वर्डप्रेस 2.3 और एक समस्या

दो बातें संक्षेप में –

वर्डप्रेस का नया संस्करण पिछले सप्ताह जारी हो गया है। यदि आप अपने सर्वर पर वर्डप्रेस इस्तेमाल करते हैं, तो क्या आप ने अपग्रेड किया। यदि नहीं तो कर लीजिए। मैं ने कल ही अपग्रेड किया। अक्षरग्राम जैसे सामूहिक चिट्ठों की भी जिन के पास कुंजी है, वे भी ध्यान दें। इस में कहने को तो कई फीचर्स जोड़े गए हैं, पर अभी तक जो बात मुझे मुख्य लगी वह यह है, कि आप श्रेणियों के अतिरिक्त टैग भी जोड़ सकते हैं।

एक समस्या जो मुझे उम्मीद थी नया संस्करण अपलोड करने से हल हो जाएगी, नहीं हुई। कुछ महीनों से नई टिप्पणियाँ आने पर मुझे मेल नहीं आती, और न ही तब जब कोई टिप्पणी मॉडरेशन के लिए रोकी जाती है। इस कारण टिप्पणियों की मंज़ूरी या उन पर प्रतिक्रिया विलंबित हो जाती है। वर्डप्रेस के नियन्त्रण पटल पर इस के लिए जो सेटिंग्स ज़रूरी थी, वह सब करने के बाद भी ऐसा हो रहा है। वर्डप्रेस के सपोर्ट फोरम में खोजने पर भी कोई हल नहीं मिला। वहाँ इतनी समस्याएँ अहलित हैं कि लगता है वहाँ लोग सो रहे हैं। आप में से किसी को ऐसी समस्या का सामना हुआ हो और उस का हल पता हो तो बताया जाए।

सोच रहा हूँ, जब कहने को लंबा चौड़ा कुछ न हो तो मुख़्तसर ही सही, कुछ न कुछ लिखा जाए। इस से चिट्ठाकारी और चिट्ठाकारों से संबन्ध बना रहेगा।

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नेत्रहीनों को कंप्यूटर पढ़ कर सुना सकता है

मैं ने पिछली बार एक प्रविष्टि लिखी थी गूगल में काम करने वाले नेत्रहीन वेब-वैज्ञानिक डा. टी.वी. रामन के बारे में। तब डा. रामन ने गूगल के आधिकारिक ब्लॉग पर अपनी प्रविष्टि में यह बताया था कि वे किस प्रकार गूगल का प्रयोग किसी व्यक्तिवाचक संज्ञा के सही हिज्जे पता करने के लिए करते हैं।

गूगल ब्लॉग पर अपनी नई प्रविष्टि में डा. रामन ने एक और रोचक तकनीक के विषय में बताया है – कि OCR (Optical Character Recognition) और वाचक ब्राउज़र के मेल से कैसे नेत्रहीनों द्वारा किसी भी दस्तावेज़ को पढ़ा जा सकता है । वे कहते हैं कि “मैं बिना कागज़ की दुनिया में रहना पसन्द करता हूँ, और हर काग़ज़ के टुकड़े को स्कैन करता हूँ”। अभी तक वे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध OCR सॉफ्टवेयर प्रयोग करते थे, पर अब उन्होंने स्वयं ही एक मुक्त तन्त्रांश वाला सॉफ्टवेयर ओसीआर-ओपस शुरू किया है। यह उन के वाचक ब्राउज़र ईमैकस्पीक से मिल कर नेत्रहीनों के लिए बढ़िया औज़ार तो बन ही गया है, पर हम जैसे लोग, जिन्हें दृष्टि प्राप्त है, भी इस का प्रयोग कर सकते हैं। ओसीआर-ओपस स्कैन हुए काग़ज़ को टेक्स्ट में बदलेगा और उस की html फाइल तैयार करेगा, और ईमैकस्पीक उसे पढ़ कर सुनाएगा।

पर हम हिन्दी वालों और अन्य भारतीय भाषाओं में काम करने वालों के लिए फिर वही प्रश्न है – हमारी भाषा में इतनी प्रगति कब होगी?

पुनश्च : यही प्रश्न मैं ने इस प्रविष्टि के अंग्रेज़ी संस्करण में पूछा था, और चूँकि उस का पिंगबैक डा. रामन की मूल प्रविष्टि पर गया, उसे उन्होंने भी पढ़ा और मेरी प्रविष्टि पर टिप्पणी के रूप में उन्होंने उत्तर भी दिया। यहाँ पढ़ें

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क्या आप वर्डप्रेस का अनुवाद कर रहे हैं

इस विषय पर यदि चिट्ठाजगत में पहले ही किसी ने सूचना दी हो तो क्षमा करें। आज कई दिनों बाद चिट्ठा लिख रहा हूँ। पिछले दिनों से व्यस्तता के कारण नियमित रूप से चिट्ठे पढ़ भी नहीं पा रहा हूँ, हालाँकि उठ रहे भूचाल से अनभिज्ञ भी नहीं हूँ।

कल ही याहू-ग्रुप्स के हिन्दी फोरम पर वी.एस.रावत जी का सन्देश देखा जिस से पता चला कि वर्डप्रेस.कॉम वाले अपने इंटरफेस का अनुवाद स्वयंसेवी आधार पर करा रहे हैं। इस साइट पर जाएँ, अपने वर्डप्रेस.कॉम प्रयोक्ता नाम और कूटशब्द से लॉग-इन करें, भाषा चुनें और शुरू हो जाएँ। इस में हिन्दी के अतिरिक्त अन्य कई भारतीय भाषाएँ हैं – اردو , मराठी, অসমীয়া, বাংলা, ਪੰਜਾਬੀ, ગુજરાતી, தமிழ், తెలుగు, ಕನ್ನಡ, മലയാളം, कश्मीरी, सिन्धी।

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पहली नज़र में तो ऐसा लगता है अधिक संख्या भारतीय भाषाओं की ही है। तो आइए, इस अनुवाद में हाथ बटाएँ। आप को जो भाषा आती हो उस में शुरू हो जाइए। मैं ने हिन्दी, कश्मीरी और उर्दू में अनुवाद शुरू कर दिया है। बस यह ध्यान रखें कि जो अनुवाद करें उसे जाँच परख कर ही सबमिट करें – और यदि वर्तनी और आधिकारिक भाषा पर पकड़ हो तभी यह कार्य करें। इस से पहले गूगल ग्रुप्स का जो अनुवाद हुआ था, वह बहुत अधकचरा था, अब जा कर कुछ ठीक हुआ है।

यह अनुवाद वर्डप्रेस.ऑर्ग से डाउनलोड होने वाले वर्डप्रेस के अनुवाद से अलग है। उस का अनुवाद हि.मो फाइल के द्वारा किया गया था, जिसे हम लोगों ने 2004 में मिल कर पूरा कर लिया था। उस में भी एक बार फिर काम करने की आवश्यकता है, क्यों कि पिछले दो-तीन वर्षों में काफी कुछ जुड़ गया है।

संबन्धित सूचना – याहूग्रुप हिन्दी फोरम के सदस्य बनने के लिए यहाँ क्लिक करें, या Hindi-Forum-subscribe@yahoogroups.com पर एक ईमेल भेजें।