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गूगल डेस्कटॉप अब हिन्दी में

गूगल डेस्कटॉप का नवीनतम संस्करण (ver. 5) अब 29 भाषाओं में है, और इस में पहली बार हिन्दी को भी जोड़ा गया है। समाचार यहाँ पर पढ़े


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जापानी में भारत-आधारित चिट्ठे

कुछ दिन पहले मुझे अपने चिट्ठे के हिट-काउंटर पर दिखा कि मेरी परिणीता फिल्म पर लिखी प्रविष्टि पर कोई पाठक जापानी साइट से आया है। वहाँ देख कर अच्छा लगा कि कई चिट्ठे जापानी भाषा में ऐसे लिखे जा रहे हैं जो भारत पर आधारित हैं। यह चिट्ठे भारतीयों के हैं या जापानियों के यह स्पष्ट नहीं हो पाया। पर यह है बानगी जापानी में लिखे जा रहे भारतीय चिट्ठों की।

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मोहल्ले के कैन्सर से बचाव के लिए एक अपील

मोहल्ला हिन्दी चिट्ठा जगत में एक कैन्सर बन कर उभर रहा है — ऐसा कैन्सर जिस का कोई इलाज नहीं लग रहा। इस चिट्ठे का और इस से जुड़े कुछ और चिट्ठों का एक ही मकसद है – हिन्दी चिट्ठाकारों और पाठकों को हिन्दू मुस्लिम झगड़े में उलझाना। हम लोग अच्छे खासे भाईचारे में चल रहे थे, इन चिट्ठों ने तूफान मचा दिया। आम तौर पर चिट्ठे मुक्त लेखन में विश्वास करते हैं – कभी कुछ लिख दिया कभी कुछ, और स्वाभाविक है इस में कभी कभार धर्म-समाज आदि की भी बात आ जाती है। पर कुछ चिट्ठे किसी एक थीम पर ही आधारित होते हैं – कुछ खेल पर, कुछ तकनीकी विषयों पर, कुछ मनोरंजन पर। और इन्होंने एक समाज विशेष को लताड़ना अपनी थीम बना रखा है, इसी का ठेका ले रखा है। यह लोग कोई समस्या हल नहीं करना चाहते, चाहते तो एक तार्किक बहस में यकीन रखते। पर यहाँ तो अहं की अति है, और दूसरों पर लांछन लगाने की अति है। एक ही कूची से सभी को रंगने की मानसिकता है। जो प्रश्न उन्हीं के विषय के सन्दर्भ में पूछे जाते हैं, उन्हें सन्दर्भहीन कहा जाता है। और खुद बेबुनियाद इलज़ाम लगाते जाते हैं दूसरों पर। जो लोग दावे के साथ यह कहें कि अमरीकी सरकार ने स्वयं वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पैंटागन पर हमला कर के हज़ारों लोगों को मारा, और गुजरात सरकार नें स्वयं गोधरा में कार सेवकों को जलाया, उन लोगों को किसी तर्क या प्रमाण की आवश्यकता नहीं है, न आप उन से तर्क या प्रमाण की बात कर सकते हैं। वे सिर्फ एक समुदाय को ही दूध का धुला समझते हैं और उस के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

उन के चिट्ठे पर कई बार टिप्पणी करने पर कोई हल नहीं मिला। कीचड़ में पत्थर फेंकते हैं तो खुद को छींटें आती हैं। और उन का मक़सद पूरा हो जाता है गन्द फैलाने का। अपने चिट्ठे पर मैं उन के प्रश्नों का उत्तर दे देता, पर मैं अपने चिट्ठे पर यह कीचड़ नहीं लाना चाहता। इसलिए मैं ने निश्चय किया है कि मैं इन लोगों से बहस में अपना समय नष्ट नहीं करुँगा। मैं ने अपने फीड रीडर से इन की फीड हटा दी है। नारद की फीड में इन की नफरत दिखती रहेगी, पर कोशिश करूँगा कि उस में से सही पोस्टें ही चुन कर पढ़ूँ। मैं उन सब चिट्ठाकारों और पाठकों से अपील करता हूँ कि यदि आप मोहल्ले की विभाजक विचारधारा से सहमत नहीं हैं, तो उन को अपने उद्देश्य में सफल न होने दें। उन के ब्लॉग पर टिप्पणी करना बन्द कर दें। अपने चिट्ठों पर भी इस विभाजक विषय पर लिखना बन्द कर दें। यदि वे आपस में ही बहस करते रहना चाहते हैं तो करें। यदि उन को इसी में अपनी जीत लगती है तो लगे। हमें इस रोज़ रोज़ के झगड़े में दिलचस्पी नहीं है। हम ने काफी कोशिश की कि इन का विलाप बन्द हो, पर यदि इन के पास और कोई विषय नहीं है तो क्या करें। बाकी लोगों के पास और भी काम हैं, और भी ग़म हैं।