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तकनीकी

एक ब्लॉगर जुगाड़

जैसा आप जानते ही होंगे, यह चिट्ठा ब्लॉगर पर न हो कर एक अलग सर्वर पर है, और वर्डप्रेस के सहारे चलता है। पर यदि आप मेरा ब्लॉगर प्रोफाइल देखेंगे तो उस में इस चिट्ठे की कड़ी भी पाएँगे। इस में कोई बड़ी बात नहीं, पर इस से यह लाभ है कि यदि मैं किसी ब्लॉगस्पॉट के चिट्ठे पर टिप्पणी करता हूँ और उस के फलस्वरूप कोई मेरे प्रोफाइल पर जाता है, तो उसे वहाँ मेरे सभी चिट्ठों की कड़ियाँ मिलेंगी। यदि आप थोड़े भी सक्रिय चिट्ठाकार हैं तो आप का ब्लॉगर खाता होना ज़रूरी है, चाहे आप का मुख्य चिट्ठा ब्लॉगर पर न भी हो। मेरे ब्लॉगर परिचय पृष्ठ को देख कर किसी ने यह प्रश्न पूछा था, इस कारण यहाँ सभी की सुविधा के लिए उत्तर दे रहा हूँ। जुगाड़ काफी सरल है।

अपने ब्लॉगर खाते में उसी शीर्षक का एक चिट्ठा बनाना शुरू करें जिस की आप कड़ी बनाना चाहते हैं। सेटिंग्स में जा कर पब्लिशिंग टैब में FTP को चुनें। FTP Server, Blog URL और Blog Filename वाले खानों में इच्छित सूचना भर दें। FTP Username और FTP Password वाले खानों में कुछ भी उल्टा सीधा भर दें, और Save settings पर क्लिक करें। बस, चिट्ठे को पब्लिश करने की ज़रूरत नहीं, न ही इस चिट्ठे पर कोई प्रविष्टि लिखने की आवश्यकता है। काम हो गया।

वैसे क्या ही अच्छा हो कि कोई ऐसा यूनवर्सल प्रोफाइल सिस्टम हो (जैसे टेक्नोराती) जिसे हर मुख्य ब्लॉग प्लैटफॉर्म पहचाने। क्या ऐसा कोई यन्त्र है?

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तकनीकी विविध

वर्डप्रेस 2.1 ऍला

वर्डप्रेस के द्वारा दी गई सूचना के अनुसार वर्डप्रेस का नया संस्करण 2.1 ऍला जारी हो गया है। इस ब्लॉग पर वर्डप्रेस का नवीनतम संस्करण स्थापित कर दिया गया है। इस संस्करण के कुछ नए फीचर्स की सूची इस पते पर देखें।

वर्डप्रेस 2.1 ऍला

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मनोरंजन विविध

भेदभाव – वहाँ शिल्पा, यहाँ राखी

यह लो, यहाँ सारा भारत और यूके शिल्पा के साथ हुए भेदभाव पर लाल-पीला हो रहा है, संसद में बात हो रही है, कूटनीतिक संबन्धों पर असर पड़ रहा है, और वहाँ शिल्पा कह रही है कि उस के साथ कोई रंगभेद वाला बरताव नहीं हो रहा। सेलेब्रिटी बिग ब्रदर न तो भारत में दिखाया जाता है, न यहाँ अमरीका में देखने को मिलता है, पर यू-ट्यूब पर जो दृष्य देखने को मिले, उन से यह तो नहीं लगता कि उन के साथ बहुत बुरा बरताव हो रहा है। यह देखिए कैसे बहस होने के बाग गले-वले मिला जा रहा है।

जो लोग भारत में बिग बॉस देखते हैं, उन्हें मालूम है कि इस शो में लोगों को इस घर में रहने के लिए बखेड़ा खड़ा करते रहना है, और एक दूसरे को बाहर करने की कोशिश करते रहना है — जितनी बेहूदगी हो उतना अच्छा। हाँ, अलग संस्कृति से आने के कारण, शिल्पा एक अलग प्रकार का अलगाव और अकेलापन महसूस कर रही है, और इन बेहूदगियों के कारण यह सब उस के लिए असह्य हो रहा है। पर वह बाहर भी नहीं आना चाहेगी, चाहे वह कितनी बार रोए, और बाहर आने की बात करे। वरना वह जाती ही क्यों ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए?

जैसे मैं ने पहले कहा था, भारत के बिग बॉस में जो सेलेब्रिटियाँ भाग ले रही हैं, वे नीम मशहूर हस्तियाँ हैं। उन के पास खोने को बहुत कुछ नहीं है, न समय, न पैसा, न शोहरत। लगता है, वही सब इस जेल से मिल जाए तो अच्छा। जैसे मीडिया-युग में “सूचक” बता रहे हैं

अपने ढलते कैरियर में रवानी लाने को उन्होने एक ऐसे कार्यक्रम में शरीर (?) होना स्वीकारा, जो इससे पहले भी अपनी प्रस्तुति में विवादों में रहा है। ये कार्यक्रम भी ब्रिटेन में धार खो रहा था। सो शिल्पा का यहां आना। उनका घुलना मिलना। जलन पैदा करना। खाना बनाना। गाली सुनना। रोना। और रेटिंग का बढ़ना।

सूचक बताते हैं कि “यहां इसी कार्यक्रम (बिग बॉस) का प्रसारण एक निजी चैनल पर हो रहा है, और सीमित दायरे में इसकी पहुंच है। सो अफेयर चले या खींचतान, फर्क बहुत नहीं पड़ता।” मुझे नहीं मालूम भारत में बिग बॉस को कितना देखा जा रहा है, और कितना पसन्द किया जा रहा है, पर मैं सोच रहा था कि भारत में सोनी की पहुँच ब्रिटेन के चैनल फोर से कम नहीं होगी। हाँ यह ज़रूर है कि कुछ तो अन्तर होगा ही भारतीय टीवी और ब्रिटिश टीवी में। बिग बॉस में गालियों को “बीप” कर दिया जाता है, बिग ब्रदर में गाली गलौज़ होती है तो वह टीवी पर सीधी सुनाई जाती है, यह देखिए इस वीडियो में शिल्पा भी गाली देने से बाज़ नहीं आ रही।

इधर बिग बॉस में कश्मीरा शाह कुछ दिन के लिए वापस आ कर तूफान मचा रही है, और उस की सब से बड़ी शिकार है राखी सावन्त। कश्मीरा को उस के बाहर जाने से पहले राखी ने जो कुछ बुरा भला कहा था, उस का पूरा बदला कश्मीरा ने एक दिन में चुका दिया। अभी तक घर वालों को शो में बाहर क्या हो रहा है, इस के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी – सब एक दूसरे की बुराइयाँ कर रहे थे इस भरोसे के साथ कि सामना तो बाहर ही होना है — अभी तो बस जीतना है। पर कश्मीरा ने राखी के टीवी पर दिखाए गए बयानों के बारे में सब को बता कर उन्हें उस के खिलाफ कर दिया। लगता है राखी सभी घरवालों में से सब से साधारण बैकग्राउंड से आई है, और सब से कम प्रतिष्ठित पेशे में है – आइटम गर्ल के। यह बात अलग है कि शायद इन सब लोगों में से ज़्यादा काम उसी के पास है। शायद इस कार्यक्रम से सब से ज़्यादा फायदा भी उसी को होने वाला है। पर कल के एपिसोड में सब लोगों ने उस के विरुद्ध इतनी गुटबन्दी की कि उस ने वीरू की तरह सूसाइड करनी की धमकी तक दे डाली।

मुझे नहीं लगता कि आम सेलेब्रिटी प्रतियोगियों को प्रतिष्ठा या काम के रूप में इस कार्यक्रम से बहुत कुछ मिलने वाला है। हाँ इस कार्यक्रम से जो पैसा मिलेगा, वही गनीमत है। सब लोगों में जितना सेलेब्रिटीपना बचा हुआ था, वह दिन रात के झगड़ों से खत्म हो गया और यह लोग आम लोगों की श्रेणी में आ गए। हाँ, यदि आप सोच रहे हैं कि कितने बेवकूफ लोग इस शो को देखते हैं, और कितने इस के बारे में लिखते हैं, तो मैं यही कहूँगा कि सास-बहू के झगड़ों वाले कार्यक्रमों के मुकाबले यह कई गुणा बेहतर है। मानव स्वभाव के बारे में बहुत कुछ पता लगता है इस शो से। घर के बहुत की कम सदस्य ऐसे हैं, स्त्री या पुरुष, जो कम से कम एक बार रोये न हों। हाँ, वहाँ शिल्पा और यहाँ (पिछले हफ्ते निकली) रुपाली ने तो रोने का ठेका ही ले रखा है।

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विविध

बुरक़ा बिकीनी

कल बीबीसी की साइट पर समाचार पढ़ा बुरक़ीनी के बारे में। बीबीसी और एनडीटीवी के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में मुसलमान लड़कियों के लिए समुद्र तट पर स्नान करने के लिए बिकीनी का विकल्प तैयार किया गया है और इसे नाम दिया गया है बुरक़ीनी, यानी बुरक़ा और बिकीनी का मेल। बताया गया है कि अब मुस्लिम लड़कियाँ बीच और सार्वजनिक स्विमिंग पूल पर तैरने जा पाएँगी और लाइफ-गार्ड का भी काम कर पाएँगी।

बीबीसी की अंग्रेज़ी साइट पर इस के बारे में एक वीडियो रिपोर्ट भी है। बेवाच के शौकीन क्लिक करने की ज़हमत न उठाएँ।

आहीदा ज़नेती, जो बुरक़ीना की डिज़ाइनर हैं, कहती हैं, “केवल मुसलमान ही पर्दा नहीं करते। और भी शर्मदार लड़कियाँ होती हैं, जो बीच पर जाना चाहती हैं, पर बिकीनी नहीं पहनना चाहतीं… और फिर यह स्विमसूट केवल हया के लिए ही नहीं, यह आप की त्वचा को धूप, रेत, आदि से भी बचाता है।” आप का क्या कहना है? क्या शर्मसार ग़ैर-मुस्लिम महिलाएँ बुर्क़ीनी को आज़माएँगी, या इसे बुरक़े का ही एक रूप समझ कर इस से पर्दा करेंगी। वैसे, भारतीय समेत कई समाजों की ग़ैर-मुस्लिम महिलाओं को स्विमिंग पूल या बीच पर बिकिनी पहनने से परहेज़ होता है, और कई बार वे कपड़े पहन कर पूल में उतरने से भी मज़ाक का कारण बनती हैं।

Burqini. Picture courtesy ahiida.comशर्मो-हया की अपनी कीमत भी है। डिज़ाइनर आहेदा की वेबसाइट पर बुरक़ीनी दो स्टाइलों में मिलती है। एक स्लिम-फिट वर्जन जो कि 170 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (5900 रुपए) में मिलती है, और एक ऍक्सट्रा लज्जा फिट जो 190 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (6600 रुपए) की है (मुद्रा दर सौजन्य xe.com)। लगता है ऍक्सट्रा लज्जा फिट को नारी के आकार को छिपाने के लिए ढीला-ढ़ाला बनाया गया होगा, और उस के लिए लगे ज़्यादा कपड़े से इस में 20 डॉलर जुड़ गए। पर क्या बीचों पर अब अधिक रंगीनी की जगह अधिक रंग मिलेगा? या यह इस्लाम के अनुयाइयों और उस के विरोधियों में एक और बहस का कारण बन जाएगा? क्या इस के खिलाफ भी कोई फतवा तैयार होगा? आखिरकार औरत की जगह बीच पर तो नहीं है न?

खैर बीच पर जो भी हो, इस बीच ब्लॉगर पब्लियस पंडित इस विषय पर कहते हैं कि थोपी गई शर्मो हया वास्तव में शर्मो हया नहीं है। उन का कहना है,

(महिला उत्पीडन) इस्लामी तानाशाही का एक और रूप है, और किसी भी तरह की बुरक़ीनी से उस का इलाज नहीं होने वाला।

अब यह सोचने वाली बात है कि क्या मुस्लिम स्त्रियों को ज़बरदस्ती पर्दे में रखा जाता है या वे मर्ज़ी से पर्दा करती हैं। मेरे विचार में दोनों ही तरह के लोग हैं। मैं ने पश्चिम में कई पढ़ी लिखी मुस्लिम महिलाओं को देखा है जो हिजाब को अपनाती भी हैं और अपने हिजाब के अधिकार के लिए लड़ती भी हैं। मेरी तो समझ में नहीं आता।

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तकनीकी

ब्लॉगर प्रयोक्ताओं के लिए खुशखबरी

यह शुभ समाचार उन लोगों के लिए है जो अपने डोमेन (जैसे shuaib.in या debashish.com) पर जाना चाहते हैं, पर होस्टिंग का खर्चा नहीं करना चाहते। हम में से अक्सर चिट्ठाकारों ने ब्लॉगर या वर्डप्रेस.कॉम की मुफ्त सेवाओं से शुरुआत की है, और उस के बाद अपने सर्वर पर चले गए हैं। अपने सर्वर पर जाने के लिए हमें एक डोमेन नाम रजिस्टर करना पड़ा और उस के इलावा वेब होस्टिंग की सेवा खरीदनी पड़ी। डोमेन नाम रजिस्टर करने के लिए एक वार्षिक शुल्क देना पड़ता है, जो सात-आठ डॉलर (300-350 रुपए) सालाना से शुरू होता है, और उस के अतिरिक्त होस्टिंग के लिए साल के कम से कम 45-50 डालर (2000-2200 रुपए)। अब नए ब्लॉगर की मेहरबानी से आप केवल डोमेन नाम रजिस्टर कराइए, दूसरे वाला खर्चा – यानी होस्टिंग का खर्चा – आप बचा सकते हैं, क्योंकि आप उसी डोमेन को ब्लॉगर के मुफ्त होस्ट की ओर डाइरेक्ट कर सकते हैं। आप के पर्मालिंक्स अपने आप बदल जाएँगे, और जहाँ जहाँ आप ने (जैसे नारद, टेक्नोराती, आदि पर) अपना पुराना पता दिया है, वह अपने आप नए पते पर रिडाइरेक्ट हो जाएगा। जैसे कि http://chitthacharcha.blogspot.com/ 2006/12/blog-post_24.html स्वयं ही http://chitthacharcha.com/2006/12/blog-post_24.html पर चला जाएगा, बशर्ते कि chitthacharcha.com रजिस्टर किया गया हो और उस की DNS Settings ठीक से भरी गई हों। अधिक जानकारी के लिए, और यह सब कैसे करना है, यह जानने के लिए इस पृष्ठ पर जाएँ। और सहायता चाहते हों तो चिट्ठाकार ग्रुप पर पूछें। हाँ यदि आप अपने डोमेन नाम से ब्लॉगिंग के अतिरिक्त और भी काम लेना चाहते हैं (जैसे मेरे सर्वर पर यूनिनागरी या अन्य पृष्ठ हैं) तो यह सेवा आप के लिए नहीं है।

भारत में डोमेन नाम रजिस्टर करने के लिए एक अच्छी कंपनी है गोहिन्दी, और क्रेडिट कार्ड से पैसा दे कर अमरीकी कंपनी से रजिस्टर करना चाहते हैं तो गोडैडी अच्छी कंपनी है। गोडैडी वाले सालाना 8.95 USD लेते हैं, पर आप उन की साइट पर घूमें फिरें तो आसानी से दस प्रतिशत का डिस्काउंट ले सकते हैं। दिक्कत हो तो पूछें। डोमेन नाम रजिस्टर करने से आप का नाम व पता हू-इज़ रजिस्ट्री में आ जाता है, और उसे कोई भी खोज सकता है। यदि आप उस पते को गुप्त रखना चाहें तो 8-10 डालर साल के और लग जाते हैं प्राइवेट रजिस्ट्रेशन के। पर गूगल ने गोडैडी से मिल कर पूरी गुप्त रजिस्ट्रेशन करने का पूरा खर्चा दस डॉलर रखा है। है न बढ़िया सौदा?

क्या इस से ब्लॉगर ने अन्य ब्लॉग प्लैटफार्मों से बाज़ी मार ली है?