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कूड़ा ईमेलों को पहचानें

कूड़ा (junk) ईमेल भेजने वाले लोग नई नई जुगतें लगाते हैं आप को धोखा देने के लिए। आजकल कई ईमेल भारतीय नामों से आते हैं, और कई बार नाम जाना पहचाना होता है और हम यह सोच कर उसे खोलते हैं कि शायद कोई अपना ही हो। आज यह ईमेल मिला

Junk email pretending to be from 123greetings

आप देखेंगे कि इस ईमेल का हैडर देख कर लगता है कि यह 123greetings.com से आया है। परन्तु ईमेल पता कुछ और है। ग्रीटिंग भेजने वाले का नाम “नेहा” लिखा है (कौन भारतीय होगा जो दो तीन नेहाओं और चार पाँच पूजाओं को नहीं जानता हो?)। जहाँ “To view your e-card, Click here” लिखा है उस लिंक का पता नीचे स्टैटस बार में लिखा है और वह किसी अश्लील साइट का या अंगिया-चोली बेचने वाली साइट का लगता है। यह बात नहीं है कि ऐसी साइट पर नहीं जाया जा सकता — पर भाई जहाँ जाना होगा मरजी से जाएँगे, धोखे से नहीं।

अपने कंप्यूटर को इस तरह की अवांछित साइटों/वाइरसों से मुक्त रखने के लिए अपने इनबॉक्स में आने वाली हर अनजान ईमेल को ध्यान से देखें। ऐसी ईमेलों का प्रयोजन होता है, या तो आप को ऐसी साइट पर ले जाना जहाँ आप अन्यथा नहीं जाएँगे, या आप के कंप्यूटर पर एडवेयर डाल देना, या वाइरस डाल देना, या फिर फिशिंग करना, यानी आप से ऐसी सूचना इकट्ठी करना जिस से आप को हानि पहुँचाई जा सके। कई बार भेजने वाले का नाम ऐसा लिखा होगा जिसे आप पहचानते हैं (जैसे Bank of America, Paypal, Amazon, आदि) पर पूरा ईमेल पता देखने पर आप को पता चलेगा कि भेजने वाले का डोमेन सही लिखा है या नहीं। यह भी संभव है कि भेजने वाले का डोमेन भी सही लगे। ऐसे में मेल में यदि कोई लिंक दिया गया है जिस पर आप को क्लिक करने को कहा जा रहा है, उस पर कर्सर रख कर स्टैटस बार में देखें कि उस कड़ी की मंज़िल कहाँ है। कई बार आप से बैंक या क्रेडिट कार्ड की जानकारी माँगी जाएगी, और यह सूचना बैंक की साइट पर जाने के बजाय किसी मछुआरे (फिशर) के जाल में फंस जाएगी।

कई बार ईमेल में वाइरस या एडवेयर का प्रोग्राम छिपा हो सकता है। वेब आधारित ईमेल (जीमेल, हॉटमेल, याहू, रेडिफ, आदि) प्रयोग करने का लाभ यह है कि ये ईमेल के अटैचमेंट को बिना स्कैन किये आप को डाउनलोड नहीं करने देते। परन्तु यदि आप ईमेल प्राप्त करने के लिए आउटलुक जैसे प्रोग्राम का प्रयोग करते हैं, तो विशेष ध्यान रखें। कई बार ईमेल बिना खोले भी उसके अन्दर छिपा कीड़ा आपका नुक्सान कर जाता है। इस से बचने के लिए एक तो अपने कंप्यूटर पर वाइरस-निरोधक अवश्य रखें। इस के अतिरिक्त यदि आप का ईमेल प्रोग्राम इजाज़त देता है तो ईमेल प्रीव्यू विंडो को निष्क्रिय कर के रखें — माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक में यह सुविधा है। इस से आप ईमेल खोलने से पहले उस का हेडर देख पाएँगे, और पहचान कर के ही उसे खोलेंगे।

अन्त में स्पैम से निपटने के कुछ गुर माइक्रोसॉफ्ट की साइट से।

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विदेश

चुनाव दिवस

विश्व की लार्जेस्ट डेमोक्रेसी में चुनाव हो रहे हों. या रिचेस्ट डेमोक्रेसी में, हम लोगों की रुचि तो बनी रहती है — वोट दे सकें या न दे सकें। कल सारे अमरीका में चुनाव हो रहे हैं, और मैं ने सोचा इस के विषय में कुछ सूचनाएँ स्वयं भी मालूम कर लूँ और आप से भी बांटूँ। आप पूछेंगे कौन से चुनाव हो रहे हैं भाई, अभी दो साल पहले ही तो चुनाव हुए थे, जब बुश जी दोबारा चुने गए थे? यहाँ के चुनावों की खासियत यह है कि हर साल चुनाव दिवस पर यहाँ चुनाव होते हैं। और चुनाव दिवस रहता है नवंबर के पहले सोमवार से अगला दिन — यानी इस बार 7 नवंबर को। यह दिन 2 नवंबर से ले कर 8 नवंबर वाले सप्ताह में आने वाले मंगलवार को पड़ता है।

यूँ तो राजनैतिक पदों के लिए चुनाव हर चार साल में होते हैं, पर हर साल किसी न किसी चुनाव की बारी आ ही जाती है — चाहे वह स्थानीय पदों के लिए हों, प्रादेशिक पदों के लिए हों, या राष्ट्रीय पदों के लिए यहाँ तक कि स्कूल बोर्ड के पदों के लिए भी । कुछ नहीं तो किसी न किसी और प्रस्ताव पर मत ड़ाले जाने होते हैं।

हाउस आफ रिप्रेज़ेन्टेटिव्ज़ (जैसे भारत में “लोक सभा” है) के लिए हर दो साल में चुनाव होते हैं, इस कारण यह चुनाव एक मध्यावधि चुनाव की तरह माना जाता है। इस से देश के नेता (राष्ट्रपति) का चुनाव तो नहीं होता, पर उस की सदन के ऊपर पकड़ पर काफी प्रभाव पड़ता है। “हाउस” के सदस्यों की संख्या 434 होती है, और उन का कार्यकाल केवल दो वर्ष होता है, जबकि राष्ट्रपति का चार वर्ष। सीनेट (“राज्य सभा”) के सदस्य छः साल तक बने रहते हैं, पर इस के 100 सदस्यों में से एक तिहाई सदस्य हर दो साल में सीधे चुनाव द्वारा चुने जाते हैं। फिर राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में होता है। इस के अतिरिक्त किसी न किसी प्रदेश के चुनाव होने होते हैं, या नगरपालिका के, या स्कूल बोर्ड के। इस के अतिरिक्त कई तरह के प्रस्ताव होते हैं, जैसे फलाँ कानून बनाया जाए या नहीं, संविधान में फलाँ संशोधन किया जाए या नहीं, (उदाहरणतः) समलैंगिकों को विवाह की अनुमति दी जाए या नहीं, वाल्मार्ट को घुसने दिया जाए या नहीं, इस तरह के कई प्रस्ताव होते हैं, जिन पर नागरिक सीधे वोट डालते हैं। यानी चुनाव दिवस पर आम तौर पर नागरिकों को कई चीज़ो पर अपना मत व्यक्त करना होता है, और कई व्यक्तियों की किस्मत का फैसला करना होता है। यह प्रस्ताव स्थानीय स्तर पर हो सकता है, प्रादेशिक स्तर पर, या राष्ट्रीय स्तर पर। इस कारण यहाँ विभिन्न प्रदेशों में, विभिन्न नगरों में अलग अलग कानून लागू होते हैं।

कहना यह है कि हर तरह का चुनाव इसी दिन होता है, और इस से चुनाव आयोग का एक काम बच जाता है – चुनाव की तारीख तय करने का।