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तकनीकी

हिन्दी एस.एम.एस. की समस्या

आलोक ने शून्य पर अपनी प्रविष्टि में मोबाइल के विषय में एक प्रश्न पूछा है। मेरे पास प्रश्न का उत्तर तो नहीं है, पर इस से मुझे अपनी मोबाइल समस्या याद आ गई। जब पिछले महीने मेरा पुराना फोन खराब हो गया, और मैं ने नया लिया तो पुराना सिम-कार्ड नए फोन में लग गया। मुझे बहुत खुशी हुई जब उस में मैं ने हिन्दी में लिखा एक सन्देश देखा। दरअसल मेरे एक पुराने सहकर्मी ने कई महीने पहले मुझे होली की शुभकामनाएँ एस.एम.एस. द्वारा भेजी थीं, जिसे मैं ने पुराने फोन में नोटिस ही नहीं किया था। लगता है नया फोन (मोटोरोला वी-188) किसी तरह से यूनिकोड हिन्दी सपोर्ट करता था। वैसे भी भारत के मुकाबले अमरीका में एस.एम.एस. का प्रयोग काफी कम होता है, इस कारण भारत से एस.एम.एस. आने पर मेन्यू में खोजना पड़ता है कि कैसे पढ़ा जाए।

फिर मैं ने वह फोन भी बदल दिया और दूसरा ले लिया। मोटोरोला रेज़र भी मुफ्त (?) था – अस्सी डॉलर दो और मेल-इन रिबेट में अस्सी वापस पाओ। मेल इन रिबेट की कहानी फिर कभी। अभी मसला यह है कि फोन तो बढ़िया मिल गया पर मेरा हिन्दी एस.एम.एस. उस पर फिर नहीं दिख रहा — केवल काले बक्से दिख रहे हैं। क्या इस के बारे में कोई बता सकते हैं कि मैं अपने मोटोरोला रेज़र पर किस तरह हिन्दी क्रियान्वित कर सकता हूँ? रेज़र इस कंपनी के नवीनतम मॉडलों में से है, पर फिर भी इस पर वी-188 के मुकाबले यूनिकोड सपोर्ट कम क्यों है?

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हिन्दी

चुटकुला-गूँज + सुभाषित-सहस्र

विवाह के विषय में कुछ सुभाषित (पुरुषों की नज़र से)


मैं ने सुना है कि प्रेम रसायनशास्त्र की तरह है। शायद यही वजह है मेरी पत्नी मुझे विषैले पदार्थ के समान समझती है।   

डेविड बिसोनेट


कोई व्यक्ति यदि आप की पत्नी को चुरा लेता है, तो उस से बदला लेने का सब से बेहतर तरीका है कि उसे ही रखने दो।   

साचा गिल्ट्री


विवाह के बाद पति पत्नी एक ही सिक्के के दो पहलू बन जाते हैं — वे एक दूसरे का मुँह नहीं देख सकते हैं पर सदा साथ रहते हैं।   


विवाह आप के लिए हर तरह से लाभकारी है — यदि अच्छी पत्नी मिली तो सुखी रहेंगे, बुरी मिली तो फिलासफर बनेंगे।   

– सुकरात


सफल विवाह में कुछ लेना होता है, कुछ देना। पति का देना और पत्नी का लेना।   


नारी हमें महान कार्य करने की प्रेरणा देती है, और उन्हें अंजाम देने से रोकती है।   

– ड्यूमास


जीवन का सब से दुष्कर प्रश्न, जिस का मुझे उत्तर नहीं मिल पाया है….. “आखिर नारी चाहती क्या है?”   

– फ्रायड


हमारा वार्तालाप हुआ — मैंने कुछ शब्द कहे, और उस ने कुछ पृष्ठ कहे।   


“कुछ लोग मुझ से हमारे सफल दांपत्य जीवन का राज़ पूछते हैं। हम हर सप्ताह में दो बार रेस्तराँ जाने का समय निकालते हैं — कैंडल-लाइट डिनर, कुछ संगीत, कुछ नाच। वह हर मंगल जाती है, मैं हर शुक्र।”   

– हेनरी यंगमैन


“मैं आतंकवाद से नहीं ड़रता। मैं दो साल तक शादीशुदा रहा हूँ।”   

– सैम किनिसन


“बीवियों के बारे में मेरी हमेशा किस्मत ख़राब रही है। पहली मुझे छोड़ कर चली गई, और दूसरी नहीं गई।”   

– पैट्रिक मरे


यह सही है कि सब लोग आज़ाद और बराबर जन्म लेते हैं, पर कुछ लोग शादी कर लेते हैं!   


विवाह एक ऐसी विधि है जिस के द्वारा आप यह मालूम करते हैं कि आप की पत्नी को किस तरह का व्यक्ति दरकार था।   


विवाह को आनन्दमय रखने के दो राज़   

1. जब आप गलत हों तो गलती मान लें
2. जब आप सही हों तो चुप रहें

– नैश


मेरी पत्नी को बस दो शिकायतें हैं — पहनने को कुछ नहीं है, और कपड़ों के लिए अलमारियाँ काफी नहीं हैं।   


मैं शादी से पहले क्या करता था? …. जो जी में आता था।   

– हेनरी यंगमैन


मेरी पत्नी और मैं बीस साल तक बहुत खुश रहे। फिर हमारी मुलाकात हुई।   

– रॉडनी डेंजरफील्ड


एक अच्छी पत्नी हमेशा अपनी ग़लती के लिए अपने पति को माफ कर देती है।   

– मिल्टन बर्ल


शादी एक अकेला ऐसा युद्ध है जिस में आप अपने शत्रु के साथ सोते हैं।   

– अनाम


“मैं ने अपनी पत्नी से कई वर्षों से बात नहीं की। मैं बीच में नहीं टोकना चाहता था।”   

– रॉडनी डेंजरफील्ड


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विविध

इंडिक ब्लॉगर अवार्ड – कुछ कमी सी है

इंडिक ब्लॉगर अवार्ड के लगभग सभी विजेताओं ने अपने चिट्ठों पर अवार्ड के बारे में लिखा है। अखबारोंटीवी चैनलों पर घोषणाएँ हो चुकी हैं। पता चला है, मेरा नाम भी पुरस्कृत चिट्ठों में है। पर मुझे अभी भी लग रहा है कि मेरा नाम वहाँ ग़लती से लिखा गया है, और अभी तक इन्तज़ार कर रहा था कि शायद वे अपनी ग़लती समझ लें — पर वे लगता हैं मुझ से भी ज़्यादा आलसी हैं। मुझे कॉमेडियन ग्राउचो मार्क्स का कहा याद आ रहा है

I sent the club a wire stating, PLEASE ACCEPT MY RESIGNATION. I DON’T WANT TO BELONG TO ANY CLUB THAT WILL ACCEPT ME AS A MEMBER.

यानी जो क्लब इतना घटिया हो कि मुझे अपना सदस्य स्वीकार करे, मैं उस का सदस्य नहीं बनना चाहता। वरना कहाँ रवि रतलामी और डा. व्योम जैसे दिग्गज या हिन्दी ब्लॉगर जैसे नियमित चिट्ठाकार, या मेरे प्रियतम चिट्ठाकार सुनील, और कहाँ मुझ जैसा आलसी चिट्ठाकार जो महीने में रोते-धोते कुल जमा तीन चार पोस्ट लिखता हो। और उन की बात की जाए जिन का नाम मेरे स्थान पर होना चाहिए था, तो पूरा ब्लॉगरोल बन जाएगा।

चलिए आप लोग तसल्ली दे रहे हैं तो मैं मान लेता हूँ कि मेरा ब्लॉग भी इतना घटिया नहीं है, पर फिर भी इंडिक ब्लॉगर अवार्ड के आयोजन से ले कर पुरस्कार घोषणा में कुछ चीज़ें ऐसी हैं कि कुछ कमी सी लग रही है। माइक्रोसॉफ़्ट जैसी प्रोफ़ेशनल कंपनी के द्वारा आयोजित किये जाने पर भी अवार्ड इतने अन-प्रोफ़ेशनल तरीके से आयोजित हुए कि दिल खुश होना नहीं मान रहा यह अवार्ड पा कर। कुछ नुक्ते

  • अभी तक भी मुझे, और जहाँ तक मुझे मालूम है औरों को, अवार्ड्स की कोई सीधी सूचना नहीं मिली है — आप का पुरस्कार डाक द्वारा भेज दिया गया है, जैसी। हिन्दी ब्लॉगर ने 26 जून को बताया कि “…अवार्ड्स घोषित हो चुके हैं. कब हुई घोषणा पता नहीं.” तब से दो सप्ताह और हो चुके हैं, पर भाषा-इंडिया ने अभी तक ज़हमत नहीं उठाई हमें बताने की।
  • मेरे चिट्ठे को “Social Activities/Activism” श्रेणी में नवाज़ा गया है। कोई मुझे बताए कि मेरा सोशल एक्टिविज़्म से क्या लेना देना।
  • रवि का वर्तमान चिट्ठा धनाधन चल रहा है — और बेहतरीन चिट्ठे का पूरा हकदार है। रचनाकार पर भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। पर उन को पुराने चिट्ठे पर सराहा गया। यहाँ तक कि उन के नाम के हिज्जे (Rathlami) भी ग़लत लिखे गए।
  • डा. व्योम जैसे साहित्यकार के तीस ब्लॉग हैं पर उन को उस चिट्ठे पर इनाम मिला, जिस के नाम (URL) में भी ग़लती से स्पेलिंग मिस्टेक हो गई है, और अन्य चिट्ठों के मुकाबले प्रविष्टियाँ भी कम हैं।
  • माइक्रोसॉफ़्ट वालों की नामांकन प्रणाली क्या थी, किस ने ग़लत चिट्ठे नामांकित किए, यह समझ में नहीं आ रहा; न यह समझ में आ रहा है कि उन की चयन प्रणाली कैसी थी, पुरस्कृत चिट्ठों को कितना पढ़ा गया, कितना रिसर्च किया गया। मैं ने तो अपना चिट्ठा स्वयं नामांकित किया था, फिर भी वोट देने और अन्तिम निर्णय करने वालों को धन्यवाद। लगता है, मैं ने अपने चिट्ठे पर कुछ देर तक जो “मुझे वोट दो” वाला बैनर लगा रखा था, वही काम कर गया।

बाकी अनियमितताओं का ज़िक्र अन्य चिट्ठों पर प्रविष्टियों और टिप्पणियों द्वारा हो चुका है। या यूँ समझें कि कुछ लोग जलते हैं कि उन्हें यह अवार्ड क्यों नहीं मिला। यह पोस्ट मैं ने ऐसे ही ईर्ष्यालु लोगों के लिए लिखी है। वरना, माइक्रोसॉफ़्ट वालों ने बहुत बढ़िया काम किया है :-)। कोई सुन रहा है, भाषा-इंडिया? मैं अभी तक मज़ाक कर रहा था। यार, हमारा भारत का पता तो पूछो जहाँ आप हमारा गिफ़्ट वाउचर भेजोगे?

फिलहाल हम ने इस अवार्ड को फ्रेम कर लिया है, क्या पता कल हमारा नाम रहे न रहे।