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एक पाती, पाती के नाम (10वीं अनुगूँज)

मेरी प्यारी पाती,

Akshargram Anugunj मुझे बहुत दुख है कि तुम अब इस दुनिया में नहीं रही। खैर जहाँ भी हो, सुखी रहो। इस दुनिया में फिर आने की तो उम्मीद छोड़ दो क्योंकि इस दुनिया में तुम्हारा स्थान ईमेल ने ले लिया है। सालों हो गए तुम्हें गुज़रे हुए। वास्तव में तुम्हारी याद तो बहुत आती है। तुम्हारे रहते ही तुम्हारी पूछ बहुत कम हो गई थी, जैसा हर किसी के साथ बुढ़ापे में होता है। लोग खबर एक दूसरे तक पहुँचाने के लिए पहले ही टेलीफोन का इस्तेमाल करने लग गए थे।

पाती लिखने के लिए कहा गया, तो मन में आया कि वास्तव में पाती ही लिखता हूँ। वही पुरानी “फूलों के रंग से, दिल की कलम से, तुझको लिखी रोज़ पाती” वाली पाती। सोचा वास्तव में चिट्ठी लिख कर उसे स्कैन करूँगा, पर देखते देखते समय निकल गया, और आसान यही लगा कि चिट्ठी तो हो नहीं पाएगी इसलिए चिट्ठा ही सही, जिस का काम भले अलग हो, नाम तो तुम से मिलता है। दिल की कलम तो तैयार थी, पर फूलों के रंग, और कोरा कागज़ ढूँढते ढूँढते समय निकल गया।

याद है जब आशिकों के बजट में कागज़, कलम और डाक-टिकट का खर्च हुआ करते थे? भूल जाओ वे दिन, अब मजनू मियाँ की जान निकल जाती है टेलीफोन का बिल भरते भरते। तुम्हारे ज़माने में जब तुम्हें आने में देर हो जाती थी तो तुम्हारे इन्तज़ार में लोग कहते थे

या खुदा क्यों उन का खत आना बन्द हुआ,
क्या मुहब्बत बन्द हुई या डाकखाना बन्द हुआ।

और अब मुझे लगता है तुम्हारे साथ साथ डाकखाने के भी दिन पूरे हो चुके हैं। याद है, तुम्हारी छोटी बहन “तार” जो छोटी होने के कारण फुर्ती से एक जगह से दूसरी जगह पहुँच जाया करती थी? आगे समाचार यह है कि तुम्हारे जाते ही उसका भी देहान्त हो गया। याद है, तारघर में कितनी लम्बी कतारें होती थीं तार भेजने के लिए? अब तारघर में तो समझो ताला ही लग गया है।

हम जैसे लोग जिन को चिट्ठी पत्री का शौक होता था, चिट्ठी का जवाब मिलने से पहले ही चिट्ठी तैयार रखते थे

कासिद के आते आते खत इक और लिख रखूँ
मैं जानता हूँ वो जो लिखेंगे जवाब मे।

पर जो भी हो, जो बात तुम में थी, वह ईमेल में नहीं। इस ईमेल के ज़रिए तुम्हें यही बताना चाहता हूँ कि तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता। कहाँ वह काग़ज़ की खुशबू, वह सलाम करने लायक लिखावट की ज़ेरो-ज़बर। भला किसी को सुना है ईमेल को चूमते हुए? फिल्म में खत हाथ में ले कर गाना गाना हो तो पहले ईमेल को प्रिंट करना पड़ेगा।

अच्छा एक बार फिर अलविदा, तुम न सही, तुम्हारी याद तो हमेशा रहेगी।

तुम्हारा
क. ख. ग.

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कान की बात

बीबीसी हिन्दी की साइट पर एक कड़ी है कान में ग्लैमर गर्ल्स। इस में पेरिस के कान (Cannes) फिल्मोत्सव में आई हुई विभिन्न अभिनेत्रियों के चित्र हैं, जो लाल कालीन पर आती हैं, मटकती हैं, अपने वस्त्रों (या वस्त्रहीनता) का प्रदर्शन करती हैं, और चारों ओर खड़े फोटोग्राफर चित्र खींचते हैं। बीबीसी के इस स्लाइड शो में “हमारी अपनी” ऐश्वर्या राय की तस्वीर भी है, और वह भी सब से पहली। पर ऐसा लगता है उन की तस्वीर ज़बरदस्ती डाली गई है। बाकी सब चित्रों में लाल कालीन है, फोटोग्राफरों की भीड़ है, पर ऐश्वर्या की तस्वीर में वे जाने कहाँ चले गए हैं, बस चित्र की पृष्ठभूमि लाल है। ऐसा तो नहीं हो सकता कि ऐश्वर्या की लाल कालीन पर फोटो हो ही नहीं। बीबीसी हिन्दी वालों ने यह अपनी खुशी के लिए किया है या पाठकों की?

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चित भी मेरी, पट भी मेरी

पाकिस्तान के धार्मिक नेताओं यानी उलेमा ने एक फ़तवा जारी किया है जिसमें कहा गया है किसी इस्लामी देश में सार्वजनिक स्थलों पर आत्मघाती हमला करना इस्लाम की नज़र में हराम है। यह सुर्खी देख कर बहुत अच्छा लगा, पर फिर ध्यान दिया कि इस में कहा गया है, “किसी इस्लामी देश में..”। यानी, किसी और देश में यदि आप आत्मघाती हमले करते हैं तो वह वाजिब है, जिहाद है, पुण्य है। किसी को कोई शक न रह जाए इसलिए इन काबिल उलेमा ने स्पष्ट किया कि “फ़लस्तीन और कश्मीर में सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले आत्मघाती हमले इस फ़तवे के दायरे से बाहर हैं..”। वाह रे तेरा न्याय। उन्हें कोई यह तो बताए कि जब कश्मीर में सार्वजनिक स्थान पर आप हमला करते हैं, उस में मुसलमान ही तो मरते हैं, ग़ैर मुसलमानों को तो आप ने पहले ही बाहर कर दिया है। … यानी मेरे यहाँ बेकसूर लोग मरें तो ग़लत, तेरे यहाँ मरें तो ठीक।

कहते हैं जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद उस में गिर जाता है। जब पाकिस्तान के धार्मिक कट्टरपन्थियों ने अपने यहाँ दहशतगर्दी के कारखाने खोले तो उन्हें अन्दाज़ा नहीं था कि कुछ असर उन के यहाँ भी होगा। अब जब उन को अपनी कड़वी दवाई का घूँट स्वयं पीना पड़ा यानी आत्मघाती हमलों में उन के लोग मरने लगे तो उन को फ़तवा जारी करना पड़ा, पर कहीं ख़ुदा-ना-ख्वास्ता इस से हर जगह अमन न फैले, इसलिए साथ में यह भी कहना पड़ा कि बाहर आप दहशतगर्दी कर सकते हैं।

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Google भारत




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Originally uploaded by elcaseo.

यह चित्र फ्लिकर से मिला। यह मेरी पहली प्रविष्टि है फ्लिकर से सीधे “ब्लॉग दिस” पर क्लिक कर के। Google ने अपने नाम को यहाँ अँग्रेज़ी में ही लिखा है। ये लोग Google हिन्दी पर भी अपना नाम अंग्रेज़ी में ही लिखते हैं। यदि आप को हिन्दी में लिखना हो तो आप कैसे लिखेंगे – “गूगल” या “गूग्ल”? मेरे विचार से दूसरा “ग” आधा होना चाहिए।